लुधियाना। फिरोजपुर रोड से दोराहा तक 26.9 किलोमीटर लंबे सिधवां कनाल एक्सप्रेस वे के डिवाइडर पर बिना जरूरत के पाइपें लगाकर पीडब्ल्यूडी ने लगभग दो करोड़ रुपए बर्बाद कर दिए। ट्रैफिक एक्सपर्ट के मुताबिक यह रेलिंग सिर्फ हाईवे के दोनों किनारों पर लगनी थी ताकि अगर कोई पैदल चल रहा है तो उसके पकड़ने के काम आ सके।
डिवाइडर (मेडियन) में लगी यह पाइपें महज शो-पीस के अलावा कुछ नहीं, जिस पर पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने यह पैसा खर्च डाला। इसी फिजूलखर्ची की वजह से पैसों की कमी होने पर अब प्रोजेक्ट का काम सुस्त स्पीड से चल रहा है। बाजार में ऐसी पाइपों के रेट, उनकी फिटिंग के लिए लगे क्लैप और मैनपावर की कास्ट मिलाकर देखें तो यह राशि लगभग दो करोड़ बनती है। वहीं, पीडब्ल्यूडी के अफसर और कंस्ट्रक्शन कंपनी के अफसर डिजाइन में ही मेडियन पर पाइपें होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
इधर, एक्सप्रेस वे अभी तक फाइनल नहीं
लगभग सात सालों से चल रहे काम के बावजूद सिधवां कनाल एक्सप्रेस वे का काम अभी तक फाइनल नहीं हुआ है। सिधवां ब्रिज के अंडरपास समेत कई जगहों पर काम चालू है। वहीं, दोराहा में नहर के ऊपर बना ब्रिज भी अभी तक नहीं बन सका है। पीडब्ल्यूडी के अफसर 3 बार इसकी डिजाइन चेंज करा चुके हैं मगर, नहर में पानी बंद करने के मुद्दे पर काम आगे नहीं बढ़ रहा है। अफसर अगले तीन महीनों में इसे कंप्लीट करने की बात कह रहे हैं लेकिन हकीकत में अभी कितना वक्त लगेगा, इसके बारे में कुछ भी क्लियर नहीं है।
गाड़ी चलाने वालों के लिए खतरा
महज शो-पीस के नाम पर डिवाइडर में लगाई यह पाइपें गाड़ी चलाने वालों के लिए खतरनाक हैं। यह पाइपें कई जगहों से टूट चुकी हैं और बाहर की तरफ निकल रही हैं। ऐसे में रात के वक्त कोई भी गाड़ी से ये टकरा सकते हैं। चूंकि इस एक्सप्रेस वे पर गाड़ियों की स्पीड बहुत तेज रहती है, इसलिए ऐसे में जानलेवा एक्सीडेंट्स होने का पूरा खतरा बना हुआ है।
जहां जरूरत, वहां हैं ही नहीं
^ एक्सपर्ट्स ने जैसा डिजाइन दिया, हम उसी हिसाब से एक्सप्रेस वे बना रहे हैं। डिजाइन में था, इसलिए मेडियन पर भी पाइपें लगाई गई। जहां किनारों पर रेलिंग न होने की बात है तो वो एक्सीडेंट्स से टूटी और कोई चोरी कर ले गया। मैं जल्द वहां विजिट करूंगा और रेलिंग लगवा दी जाएंगी।
बप्पी दास, सुप्रीम इन्फ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन कंपनी।