लुधियाना। प्रॉपर्टी टैक्स भरने के नाम पर नगर निगम सुविधा सेंटर जोन ए में तैनात सुपरवाइजर सिमरजीत सिंह ने लोगों का पैसा हड़प लिया। इस मामले का खुलासा होने पर सोमवार को एडिशनल कमिश्नर अमृत कौर गिल ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पेश हुए सुपरवाइजर सिमरजीत सिंह ने अपनी गलती को मानते 11 हजार रुपए वापस कर दिए।
एडिशनल कमिश्नर ने आरोपी सिमरजीत सिंह को नौकरी से बर्खास्त करने की सिफारिश कमिश्नर को भेज दी है। इस घपले के बाद अब सिमरजीत सिंह के डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान सभी प्रॉपर्टी टैक्स एंट्री की जांच शुरू कर दी है। सिमरजीत सिंह ने डेढ़ साल के दौरान करीब 218 प्रॉपर्टी टैक्स की ऑफ लाइन एंट्री की है। इसमें 70 एंट्री में कैश रसीद (जी8) पुरानी डाली गई है। ऐसे में घपले की राशि और बढ़ेगी। वहीं निगम की तरफ से अब अन्य तीन जोनों पर भी जांच करनी शुरू कर दी है। यहां बता दें कि सिमरजीत सिंह निगम सुविधा सेंटर पर एक कंपनी के माध्यम से रखा गया है।
क्या हैं ऑफ लाइन एंट्री
काबिलेजिक्र है कि सुविधा सेंटर पर प्रॉपर्टी टैक्स दो तरीके से भरा जाता है। पहले तरीके के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सुविधा सेंटर पर सीधे आकर प्रॉपर्टी टैक्स भरता है तो वहां मौजूद मुलाजिम तुरंत कंप्यूटर पर ऑनलाइन एंट्री डालकर रसीद देता है। ऑनलाइन एंट्री के समय कंप्यूटर खुद कैश रसीद (जी8) नंबर डाल देता है। वहीं अगर फील्ड में जाकर मुलाजिम खुद प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा एकत्र करते हैं तो मौके पर ही प्रॉपर्टी मालिक को कैश रसीद दी जाती है। शाम तक इस तरह आने वाले पैसे की सुविधा सेंटर में आकर ऑफ लाइन एंट्री डाली जाती है। यानी मुलाजिम जो कैश रसीद नंबर देता है, उसका नंबर रिटर्न में डाला जाता है।
तहबाजारी की रसीद को डाला रिटर्न में
निगम मुलाजिमों द्वारा फील्ड से प्रॉपर्टी टैक्स के एवज में लाया गया पैसा सुविधा सेंटर पर जमा करवाया जाता था। सुपरवाइजर सिमरजीत सिंह मुलाजिम की तरफ से काटी गई कैश रसीद नंबर डालने की जगह दो साल पुरानी तहबाजारी या फिर अन्य विभाग द्वारा कैश रसीद का नंबर डालकर रिटर्न फाइल कर रहा था। इस तरह वह पैसा अपनी जेब में डाल रहा था। किसी व्यक्ति को शक होने पर इसकी शिकायत निगम अफसरों के पास की गई, जिसकी जांच होने पर यह खुलासा हुआ।