हिंदी भाई की कलाई पर नहीं बंधेगी चीनी भाई की बनाई राखी, हिंदू-सामाजिक संगठनों का विरोध

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
होशियारपुर. चीन के साथ रिश्तों में आई खटास को लेकर इस बार भारतीय ग्राहक उसे सबक सिखाने की तैयारी कर चुका है। भारतीय त्यौहारों में अपना सामान बेचने वाले चीन को इस बार मुंह की खानी पड़ेगी। राखी के त्यौहार पर बाजारों में कई तरह की राखियां आई हैं पर ज्यादातर बाजारों में इंडियन राखी बेची जा रही है। हिंदू एवं सामाजिक संगठनों के चीनी सामान के विरोध के चलते व्यापारियों ने बहुत कम चीन की राखी लाई है।
 
शहर के घंटाघर चौक के पास राखियां बेचने वाले दुकानदार सुनीश जैन ने बताया कि चाइनीज राखी अन फीनिशड राखी आती है और यहां आकर राखियों की पैकिंग की जाती है। चाइनीज राखी सिर्फ बच्चों की रही है, जैसे म्यूजिक वाली या टेडीबियर वाली। चाइनीज राखी ज्यादातर बच्चों की आती हैं। चाइनीज राखी की कीमत 10 से 100 रुपए तक है और इंडियन राखी की कीमत 10 से 350 रु तक। भारत में राखियों का मेन हब कोलकाता है। यहां पर 80 प्रतिशत राखी कोलकाता में बनती हैं।
 
दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि चीन की आईटमों को लेकर विरोध हो रहा है। ऐसे में उसी माल को लाया है जो बिके ताकि आमदन ठीक रहे। ऊपर से यह भी भय है कि कहीं सोशल संगठन माल को जबरन फेंक दें। इसलिए भारतीय माल को ही तरजीह दी है। राखी भाई-बहन का पवित्र त्यौहार है और इसके लिए भारत में बनी राखी की अपनी अहमियत है।
 
डाकखाने पहुंचे लिफाफे

दूसरोंराज्यों एवं विदेश में काम की तलाश में गए भाईयों, रिश्तेदारों को राखी पहुंचाने के लिए डाक विभाग में खूबसूरत लिफाफे पहुंच गए हैं, जिसमें राखियां भेजी जा सकती हैं। दस रुपए की कीमत वाले खास लिफाफे पर भी राखी बनी है ताकि पता चल जाए इसमें बहन अपने भाई को राखी भेज रही है। पोस्ट मास्टर कुलवंत सिंह ने बताया कि डाकखाने में पर्याप्त मात्रा में राखी लिफाफे पहुंच गए हैं और लोग अपने रिश्तेदारों को राखी भेजना शुरू कर दिया है ताकि त्योहार पर राखी मिल जाए।
 
खबरें और भी हैं...