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इन्होंने लिया था लालाजी की मौत का बदला, बीच सड़क पर अंग्रेज को मारी थी गोलियां

6 वर्ष पहले
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लुधियाना। देश को आजादी दिलाने में कई शूरवीरों ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। ऐसे ही एक वीर थे शेर-ए-पंजाब लाला लाजपतराय। लाला लाजपतराय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के वह महान सेनानी थे जिन्होंने देश सेवा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। यही कारण था कि भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे देशभक्त उनका सम्मान करते थे। जिन्होंने लालाजी की मौत का बदला ठीक एक महीने बाद लिया। इन देशभक्तों ने ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को बीच सड़क पर गोलियों से छलनी कर दिया था।

आज लाल लाजपतराय की पुण्यतिथि है। इस अवसर पर dainikbhaskar.com अापको बताने जा रहा है उनके जीवन से जुड़ी कहानियों के बारे में।

बात तीन फरवरी 1928 की है। जब साइमन कमीशन भारत अाया था। जिसके विरोध में पूरे देश में आग भड़क उठी। लाहौर में 30 अक्टूबर 1928 को एक बड़ी घटना घटी जब लाला लाजपतराय के नेतृत्व में साइमन का विरोध कर रहे युवाओं को बेरहमी से पीटा गया। पुलिस ने लाला लाजपतराय की छाती पर निर्ममता से लाठियां बरसाईं। वे बुरी तरह घायल हो गए और इस कारण 17 नवंबर 1928 को उनकी मौत हो गई।
इन जांबाजों को बदले में मिली थी फांसी
लाला जी की मृत्यु से सारा देश भड़क उठा और चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने लालाजी की मौत का बदला लेने का निर्णय किया। इन जांबाज देशभक्तों ने लालाजी की मौत के ठीक एक महीने बाद अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली और 17 दिसंबर 1928 को ब्रिटिश पुलिस के अफसर सांडर्स को गोली से उड़ा दिया। लालाजी की मौत के बदले सांडर्स की हत्या के मामले में ही राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई।
पंजाब में हुआ था लालाजी का जन्म
लालाजी का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के फिरोजपुर में हुआ था। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानून की उपाधि प्राप्त करने के लिए 1880 में लाहौर के राजकीय कॉलेज में प्रवेश ले लिया। इस दौरान वे आर्य समाज के आंदोलन में शामिल हो गए।
लिखी कई महापुरुषों की जीवनियां
लालाजी ने हिन्दी में शिवाजी, श्रीकृष्ण और कई महापुरुषों की जीवनियां लिखीं। उन्होंने देश में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में बहुत सहयोग दिया। देश में हिन्दी लागू करने के लिए उन्होंने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था।
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