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सात साल से मंदिर में चल रहा है स्कूल

7 वर्ष पहले
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ताजपुर रोड बिहारी कॉलोनी के मंदिर में पढ़ते मां शारदा विद्यापीठ स्कूल के बच्चे।

मंजू कपूर|लुधियाना

ldh.bhaskar@gmail.com

बिहारीकाॅलोनी ताजपुर रोड पर 7 साल से मंदिर में ही मां शारदा विद्यापीठ स्कूल के बच्चे पढ़ रहे हैं। 5वीं क्लास तक के इस स्कूल में काॅलोनी के लगभग 360 बच्चे पढ़ते हैं। बच्चे स्कूल में हर एक्टिवटी में भाग भी लेते हैं। लोगों के मुताबिक 30 साल पहले बनी इस काॅलोनी की सुध तो सरकार ने ली और ही किसी पार्षद ने। काॅलोनी की तंग गलियों में साक्षरता कभी दाखिल नहीं हुई।

काॅलोनी के बच्चे घूमते बड़े हुए और कई दिहाड़ी मजदूर और कई किसी फैक्ट्री में मजदूर बनकर रह गए। लेकिन सात वर्ष पहले नोबल फाउंडेशन और काॅलोनी के दुकानदार किशोरी लाल के सहयोग से बच्चों को पढ़ने के लिए समझाया गया। लेकिन पढ़ाने के लिए जगह की दिक्कत अाड़े आई। उस समय काॅलोनी के मंदिर के लिए रखी गई 30 गज जगह लोगों ने बच्चों को पढ़ाने के लिए इस वादे से दी कि फाउंडेशन मंदिर का निर्माण करवाएगी। पहले 22 बच्चे स्कूल में आए। दो वर्ष तक कच्ची जगह पर छप्पर के नीचे बैठ बच्चे पढ़ने के लिए आते रहे। बारिश के दिनों में यही बच्चे अपने घर से बर्तन भी साथ लाते, जहां से छत टपकती वहीं बर्तन रख देते। पेरेंट्स मिट्‌टी और चूने से स्कूल के प्रांगण की लिपाई करते। दो साल बाद तीन मंजिल स्कूल के साथ ही मंदिर बनवाया गया। अब सुबह मंदिर में लोग पूजा करते हैं उसके बाद 8 बजे स्कूल लगता है। स्कूल में सात टीचर्स इंचार्ज रेणू बाला के साथ बच्चों को पढ़ाती हैं। माया देवी का कहना है हम कभी स्कूल नहीं गए। हमारे माता-पिता और हमारे बच्चे भी नहीं पढ़ पाए। लेकिन अब नाती और नातिन जब हमें अंग्रेजी बोलकर दिखाते हैं तो कुछ समझ ना आने पर भी बच्चों के चेहरों के भाव से हम समझ जाते हैं। बाकी बच्चे बता देते हैं। स्कूल में तीन बच्चों को पढ़ने के लिए भेजने वाली गीता देवी कहती हैं हम स्कूल नहीं गए। लेकिन बच्चों को पढ़ने में किसी तरह की दिक्कत ना आए, इसके लिए स्कूल के प्रांगण को दो वर्ष तक चूने और मिट्टी से लीपते रहे।