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बठिंडा में एक ही स्कूल के 40 बच्चों को पीलिया, पेरेंट्स ने किया हंगामा

7 वर्ष पहले
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गुरुहरकृष्ण पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को बच्चों के घरवालों ने जमकर हंगामा किया। घरवालों ने आरोप लगाया कि स्कूल में दूषित पानी पीने से 40 बच्चे बीमार हो गए हैं। सभी का इलाज चल रहा है। उधर दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधकों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को स्कूल में साफ पानी पीने के लिए दिया जा रहा है। करीब एक घंटे तक घरवालों और स्कूल के प्रिंसिपल में बहसबाजी होने के बाद मामला शांत हो सका। स्कूल के बच्चों का इतनी संख्या में बीमार होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के विभिन्न कक्षाओं में पढऩे वाले 40 से ज्यादा बच्चे इस समय पीलिया की चपेट में हैं। इनमें से एक बच्चे की हालत ज्यादा बिगडऩे के कारण उसको डीएमसी लुधियाना में दाखिल करवाया गया। जबकि बाकी बच्चों का बठिंडा में इलाज चल रहा है। वहीं दूसरी तरफ घरवालों ने बताया कि बच्चों का कहना है कि स्कूल के वाटर टैंक में छिपकली मिली है। जबकि स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है। इस कारण स्कूल के बच्चे अपने लिए पानी की बोतलें भी घरों से लेकर आने लगे हैं।

स्कूल में बच्चों के घरवालों के हंगामे के दौरान स्कूल स्टाफ भी इकट्ठा हो गया। जिन्होंने स्कूल प्रिंसिपल के हक में बोलते हुए कहा कि बच्चे किसी और कारण भी बीमार हो सकते हैं। स्कूल का पानी वह भी पीते हैं लेकिन उनको तो कोई समस्या अभी तक नहीं आई। अगर स्कूल का पानी पीने से ही बच्चे बीमार होते हैं तो सभी बच्चे बीमार होते।

नहींहै पीने लायक जमीनी पानी : शहरके सरकारी प्राइमरी स्कूलों के अलावा मिडल, सेकंडरी स्कूलों में भी बच्चे जमीनी पानी पीने को मजबूर हैं। शहर का का जमीनी पानी बेहद खारा होने और उसमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है। इसलिए इसे पीने लायक नहीं माना जाता। जिन स्कूलों में पेयजल के लिए वाटर वर्कर्स का कनेक्शन है, उनमें भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंचता। इसके चलते बच्चे हैंडपंप के जरिये निकलने वाला दूषित पानी पीते हैं।

शहर के कई स्कूलों में समाजसेवी संस्थाओं की ओर से आरओ दान दिए गए हैं। लेकिन उनकी भी अब हालत खराब हो गई है। स्कूलों का स्टाफ तो अपने लिए घरों से बोतलों में पानी लाकर गुजारा चला लेता है जबकि बच्चे हैंडपंप का पानी ही पीते हैं। गर्मियों में पानी जनित बीमारियां बढ़ने के चलते गर्मियों में इन स्कूलों के बच्चों के स्व