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हॉस्पिटलों में स्वाइन फ्लू की प्रोटेक्शन किट पहुंचने से स्टाफ भी दहशत में

6 वर्ष पहले
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स्वाइनफ्लू को लेकर आम लोगों में ही नहीं हॉस्पिटल के स्टाफ में भी दहशत है। इसी कारण जिन हॉस्पिटलों में सेहत महकमे ने प्रोटेक्शन किट नहीं भिजवाई, वे स्वाइन फ्लू के मरीजों को रखने के लिए तैयार नहीं हो पाए। हालांकि सेल्फ प्रोटेक्शन के लिए हॉस्पिटल स्टाफ और डॉक्टरों ने खुद ही मास्क पहनना शुरू कर दिया है।

सिविल हॉस्पिटल के दौरे पर पहुंचे डायरेक्टर हेल्थ डॉ. करनजीत सिंह ने दावा किया कि डिपार्टमेंट के पास स्वाइन फ्लू के इलाज का पूरा प्रबंध है। इस कारण लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बी-कैटेगरी में शामिल लोगों को भी हॉस्पिटल में एडमिट होने की बजाय घर में प्रिकॉशन लेकर दवाई खानी चाहिए।

केवल सी-कैटेगरी के मरीजों को ही अस्पताल में दाखिल होने की जरूरत है। इस कैटेगरी के में वे मरीज शामिल किए गए हैं, जो पहले से डायबिटीज, शुगर, हार्ट डिजीज, निमोनिया, चेस्ट इंफेक्शन, ब्रेन इंफेक्शन, किडनी इंफेक्शन या कैंसर इंफेक्शन से पीड़ित हैं। स्वाइन फ्लू का शक होने पर केवल इन मरीजों का सैंपल ही टेस्ट के लिए भेजा जाता है। सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी पर उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू के हर मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं होती।

दीपहॉस्पिटल में नहीं पहुंची स्वाइन फ्लू की प्रोटेक्शन किट: स्वाइनफ्लू से लड़ने के लिए रिजर्व किए गए अस्पतालों की सूची में शामिल दीप हॉस्पिटल में अभी तक प्रोटेक्शन किट नहीं पहुंची है। इसी कारण अभी तक यहां किसी स्वाइन फ्लू के मरीज को नहीं लिया गया। हॉस्पिटल में स्वाइन फ्लू के लिए नोडल अफसर बनाए गए डॉ. रविकांत ने बताया कि हेल्थ डिपार्टमेंट ने रिजर्व रखे गए अस्पतालों को प्रोटेक्शन किट मुहैया कराई है। जिसमें स्टाफ के लिए एन-95 थ्री लेयर के मास्क, सैंपल लेने के लिए वायल और टेमी फ्लू की दवाई शामिल है।

स्वाइन फ्लू के मरीजों को डील करने के लिए तैनात होने वाले स्टाफ को गाउन, शूज अस्पताल खुद मुहैया करवाता है। उन्होंने बताया कि जितने स्टाफ के लिए किट आएंगी, उतने ही बेड रिजर्व किए जाएंगे। फिलहाल तक उनके हॉस्पिटल को यह किट नहीं मिली है। इस बारे में जिला एपिडेमोलॉजिस्ट से बात हो गई है। एक-दो दिन में किट मिलेगी।

पंजाबमें 102 सस्पेक्टेड में से 42 कंफर्म हुए: डायरेक्टरहेल्थ डॉ. करनजीत सिंह ने बताया कि पंजाब में 102 सस्पेक्टेड मरीजों का सैंपल टेस्ट के लिए भेजा गया था। इनमें से 42 लोगों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। जबकि 15 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों की मौत की वजह स्वाइन फ्लू नहीं, बल्कि उनकी दूसरी बीमारियां रही हैं। स्वाइन फ्लू से उनकी इम्युनिटी पावर और कम हो गई, जिसकी वजह से दूसरी बीमारियां उन पर हावी हो गई थीं।

10 अस्पतालों में 29 बेड हैं रिजर्व

स्वाइनफ्लू से लड़ने के लिए सेहत विभाग ने शहर के 10 अस्पतालों से टायअप किया है। इनमें 29 बेड रिजर्व रखे गए हैं। सिविल सर्जन ऑफिस से मिली जानकारी के मुताबिक डीएमसीएच में 2, सीएमसीएच में 15, अपोलो हॉस्पिटल में 2, गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) में 2, दीपक हॉस्पिटल में 1, फोर्टिस हॉस्पिटल में 2, मोहन देई ओसवाल हॉस्पिटल में 3 और सिविल हॉस्पिटल में 2 बेड स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए रखे गए हैं। जबकि दीप हॉस्पिटल और ईएसआई के बेड अभी कंफर्म नहीं हैं।

और बी कैटेगरी को टेस्ट की जरूरत नहीं

डायरेक्टरहेल्थ ने बताया कि मामूली जुकाम या फ्लू वाले मरीजों को ए-कैटेगरी में रखा गया है। इन्हें एंटीबायोटिक देकर घर भेज दिया जाता है। बी कैटेगरी में वे लोग आते हैं, जिन्हें तेज बुखार, जुकाम और खांसी है। इन मरीजों को टेमी फ्लू नामक दवाई देकर घर जाकर प्रिकॉशन बरतते हुए दवा खाने की सलाह दी जाती है। केवल सी-कैटेगरी के लोगों को ही एडमिट होने की जरूरत है। इन मरीजों का सैंपल ही स्वाइन फ्लू टेस्ट के लिए भेजा जाता है।