पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • हरिंदर जतिंदर ने आम आदमी पार्टी के कैंडीडेट को दिलाए थे बंपर वोट

हरिंदर-जतिंदर ने आम आदमी पार्टी के कैंडीडेट को दिलाए थे बंपर वोट

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गांवभौपुरके सगे भाई हरिंदर और जतिंदर जमालपुर इलाके में पुलिस एनकाउंटर के नाम पर गोली मारकर ढेर किए गए, उनके कत्ल की एक वजह सियासी रंजिश भी है। इस दोहरे हत्याकांड से गुस्साए गांव वाले बेशक आपस में ऐसी चर्चाएं कर रहे हैं, लेकिन आरोपियों की दहशत के चलते खुलकर सामने नहीं आना चाहते हैं। बहरहाल चुनावी-नतीजों के आंकड़े भी सियासी रंजिश की तरफ इशारा कर रहे हैं। पिता सतपाल सिंह ने इस मामले की जांच को लुधियाना पहुंचे एससीएसी कमीशन के वाइस चेयरमैन डॉ.राजकुमार वेरका से शिकायत के दौरान यह भी खुलासा किया।

सतपाल और उनके छोटे भाई हकीकत सिंह तो सीधे बोल रहे हैं कि जैसी लहर लोकसभा चुनाव में चली थी, उसी माहौल में स्टूडेंट और नौजवान होने के नाते दोनों भाई भी झाड़ू वाले (आप कैंडीडेट) के साथ हो गए थे। उन्होंने पूरे इलाके में आप कैंडीडेट का खुलकर प्रचार किया था। दोनों भाई पहले से ही नजदीकी गांव तखरां की सरपंच के पति और अकाली नेता गुरजीत सिंह सैम की आंख में खटकते थे। उसने दोनों भाइयों को पहले आप उम्मीदवार के प्रचार से रोका। मना करने के बावजूद प्रचार करने और गांव में आप उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलने पर वह बुरी तरह चिढ़ गया।

उसने माना कि दोनों भाइयों के खुलकर प्रचार करने से ही आप उम्मीदवार को उनके गांव में बंपर वोट मिले। उसी रंजिशन में उसने सियासी रसूख और पुलिस से नजदीकी के चलते दोनों भाइयों पर हत्या के प्रयास का केस बनवाया। फिर साजिशन उसी केस की आड़ में फरार दोनों भाइयों को पुलिस रेड के बहाने कत्ल कर डाला। पिता, चाचा और अन्य रिश्तेदारों का तर्क है कि दोनों की हत्या के आरोप में गुरजीत और तीन पुलिस मुलाजिमों पर केस दर्ज होने से इसकी तस्दीक भी होती है।

दहशतगर्दी

वर्दी की

600 में से 300 वोट मिले थे आप कैंडीडेट को

गांवभौपुर लोकसभा सीट फतेहगढ़ साहिब का हिस्सा है। जबकि इसका विधानसभा हलका समराला है और शिरोमणि अकाली दल को पिछले विस चुनाव में भी यहां से शिकस्त मिली थी। इस बार लोस चुनाव में गांव भौपुर के करीब 600 वोटरों में से 300 ने आप के हक में वोटिंग की, जबकि कांग्रेस को 70 और अकाली उम्मीदवार को महज 60 वोट मिले थे। गांव के सरपंच धीर सिंह ने इन आंकड़ों की तस्दीक की, लेकिन अकाली होने के नाते उन्होंने हरिंदर-जतिंदर हत्याकांड को लेकर कोई कमेंट नहीं किया।