लुधियाना. बैंसऔर तलविंदरजीत सिंह साही जैसे बास्केटबॉल प्लेयर्स के साथ खेलने का सपना हर खिलाड़ी देखता है। अपने इसी सपने को लुधियाना की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले 19 साल के लवनीत सिंह अटवाल ने पूरा किया। शहर के नवभारत पब्लिक स्कूल के स्टूडेंट्स इस युवा खिलाड़ी के पिता किरपाल सिंह भी बास्केटबॉल प्लेयर रह चुके हैं।
लवनीत ने जज्बाती होकर बताया कि उनके पिता आर्थिक कारण से वो अपने खेल को आगे नहीं बढ़ा पाए। लिहाजा उन्होंने अपने बेटे के सामने इंटरनेशनल लेवल पर परफॉर्म करने की ख्वाहिश रखी। लवनीत ने उनकी ख्वाहिश पूरी करने के साथ देश का भी नाम रोशन किया। महज 8 साल की उम्र से ही अपने जुड़वां भाई खुशमीत के साथ गुरुनानक स्टेडियम की बॉस्केटबाल अकादमी में जाने लगा, फिर धीरे-धीरे इंटरनेशनल प्लेयर बनने का जुनून पैदा हुआ। सन 2004 में लवनीत ने डॉ.एस. सुब्रामणियम से बास्केटबाल की ट्रेंनिग लेनी शुरू की। लगभग 10 साल तक उनसे ट्रेनिंग लेने के बाद जिला लेवल पर कई मैच खेले। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।स्टेट और नेशनल लेवल पर खेलते हुए लवनीत 17 साल की उम्र में पहली बार 2012 में इंटरनेशनल लेवल पर खेलने गए।
इंडियन बास्केटबॉल टीम की तरफ से खेलते हुए लवनीत ने वियतनाम में अंडर-17 फिबा एशिया बास्केटबॉल चैंपियनशिप (2012) में जीत हासिल की। इसके बाद 2013 में इटली में वर्ल्ड यूथ बास्केटबॉल चैंपियनशिप शूटिंग कांटेस्ट में भी जीत का परचम लहराया।
इसके अलावा 2013 में ही टोक्यो (जापान) में सीनियर ग्रुप में कोचिंग कैंप के लिए सिलेक्शन हुआ और 2013 में बैंकाक में हुए थ्री ऑन थ्री बास्केटबॉल चैंपियनशिप में इंडिया बास्केटबॉल टीम की कप्तानी कर सिल्वर मेडल जीता। जबकि 2014 में बीजिंग में हुए थ्री ऑन थ्री केएफसी टूर्नामेंट में पहले पोजीशन हासिल की। लवनीत का कहना है कि मेरे खून में बास्केटबॉल है, मैं बचपन से ही इस खेल को खेलते हुए बड़ा हुआ हूं। जगदीप सिंह बैंस और तलविंदर सिंह साही के साथ खेलना और इंडियन बास्केटबॉल टीम का मेंबर बनना मेरे लिए सपने जैसा था, और मैंने अपने इस सपने को पूरा किया।