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एयरफोर्स के इकलौते परमवीर चक्र विजेता को अपना शहर ही गुमनाम कर गया

7 वर्ष पहले
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मोहित बहल/कौशल सिंह|लुधियाना

\\\'शहीदोंकी चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरनेवालों का यही बाकी निशां होगा। कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे, जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमां होगा।\\\' स्व. जगदंबा प्रसाद मिश्र \\\'हितैषी\\\' जी की ये चंद पंक्तियां इंडियन एयरफोर्स के इकलौते परमवीर चक्र विजेता शहीद फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की 43वीं पुण्यतिथि पर शायद उनका शहर लुधियाना ही दोहराना भूल गया। तो जिला प्रशासन की ओर से इस मौके पर किसी फंक्शन का आयोजन किया गया और ही किसी नेता या संस्था ने ही उन्हें याद करने की जरूरत समझी। बस शहीद सेखों के बुत पर किसी ने चंद फूलों के हार चढ़ाकर उनकी कुर्बानी को गुमनाम करना ही मुनासिब समझा।

पुश्तैनीहै वीर की विरासत: 17जुलाई 1943 को लुधियाना के इस्सेवाल में जन्मे शहीद निर्मलजीत सिंह सेखों में फौज में जाने का जज्बा अपने पिता और दादा से विरासत में मिला। शहीद निर्मलजीत सिंह सेखों के दिवंगत पिता फ्लाइट लेफ्टिनेंट तिरलोक सिंह ने भी सेना में वारंट ऑफिसर के पद पर अपनी सेवाएं दी थीं और उनके दादा बचन सिंह भी आज़ादी से पहले की ब्रिटिश इंडियन आर्मी में भर्ती हुए और चीन में भी तैनात रहे।

दुश्मनभी हुए उनकी वीरता के मुरीद: 1968में सेखों ने फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर एयरफोर्स ज्वाइन किया। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सेखों श्रीनगर स्थित एयरफोर्स की 18 स्क्वॉड्रन में तैनात थे और 14 दिसंबर को श्रीनगर एयरफील्ड पर जब 6 पाक सेबर फाइटर जहाजों ने अचानक हमला बोल दिया तो भारी बमबारी होने के बावजूद सेखों ने जान की परवाह किया बगैर जैसे-तैसे अपने जहाज में उड़ान भरी और दुश्मन के 6 जहाजों पर हमला बोल उन्हें अपने वायु सीमा से भागने पर मजबूर कर दिया। इस लड़ाई में सेखों का विमान क्षतिग्रस्त होकर जमीन गिरा और सेखों को वीरगति मिली। शहीद सेखों को उनके मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। पाक एयरफोर्स के एयरकोमोडोर कैसर तुफैल (रि.) ने ग्रेट एयर बैटल्स ऑफ़ पाकिस्तान के एक अध्याय में उनकी सराहना भी की है।

^ जब दादा-दादी और पिता जिंदा थे, प्रशासन और एयरफोर्स से कोई कोई आकर मेरे ताया जी के जन्मदिन और शहादत पर उन्हें याद करने घर आते थे। पिछले 4 साल से वे हमारे घर का रास्ता ही भूल गए। सम्मान मिलना तो दूर शहीद परिवार से होने के बावजूद हमें अपना काम पैसे देकर करवान