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मेडिकल पैनल की जांच पूरी पीएम रिपोर्ट का इंतजार

7 वर्ष पहले
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सीएमसीएचमें सात साल की थैलेसीमिक बच्ची हरलीन की मौत की जांच कर रहे मेडिकल पैनल ने दोनों पक्षों की स्टेटमेंट दर्ज कर ली है। पैनल अब राजिंदरा मेडिकल कॉलेज से आने वाली पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। उसके आने के बाद ही इसकी फाइनल रिपोर्ट तैयार करके सिविल सर्जन के माध्यम से पुलिस कमिश्नर को भेजी जाएगी। बच्ची के पिता इंद्रप्रीत सिंह जहां सीएमसी मैनेजमेंट को भी उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं सीएमसी मैनेजमेंट इसके लिए डोनर प्रोवाइड कराने वाली चेन्नई की एनजीओ दातरी स्टेमसेल डोनर रजिस्ट्री पर जिम्मेदारी डाल रहा है।

4 अक्टूबर को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए सीएमसीएच में आई हरलीन कौर थैलेसीमिया से पीड़ित थी। डॉक्टर ने उसका 15 अक्टूबर को बीएमटी करना था। लेकिन कीमोथैरेपी शुरु होने के 2 दिन बाद डोनर मुकर गया। स्टेमसेल डेड होने की वजह से हरलीन के शरीर में इंफेक्शन फैल गई और 4 नवंबर की सुबह उसकी मौत हो गई। उसके पिता इंद्रप्रीत ने सीएमसी हॉस्पिटल, चेन्नई की एनजीओ दातरी डोनर को जिम्मेदार ठहराते हुए 13 नवंबर को पुलिस कमिश्नर प्रमोद बान को शिकायत दी थी। बान ने सिविल सर्जन डॉ. सुभाष बत्ता को मामले की जांच करने के लिए कहा था। डॉ. बत्ता के आदेश पर बना सिविल हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. सुरेश कौशल, पीडियाट्रिशियन डॉ. हरजीत सिंह पैथोलॉजिस्ट डॉ. सविता पर आधारित मेडिकल पैनल मामले की जांच कर रहा है।

पैनल ने सीएमसी में हरलीन के ट्रीटमेंट का रिकॉर्ड देखने के बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट के हेड डॉ. जोसेफ जॉन और बच्ची के पिता इंद्रप्रीत के बयान दर्ज कर लिए हैं। इस मामले में आखिरी सुनवाई 12 दिसंबर को हुई है। पैनल अब पटियाला के राजिंदरा मेडिकल कॉलेज की लैब से आने वाली बिसरा और बोन पीस की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। उसके आने के बाद ही यह रिपोर्ट फाइनल हो सकेगी।

^ मामले की जांच अभी जारी है। फाइनल रिपोर्ट तैयार होने से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता। -डॉ.सुरेश कौशल, पैनलके हेड

^डोनरका इंतजाम करने के लिए सीएमसी ने ही दातरी से करार किया था। डोनर अगर मुकरा है तो दातरी के साथ-साथ सीएमसी मैनेजमेंट भी जिम्मेदार है। -इंद्रप्रीतसिंह, हरलीनके पिता