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सरकारी पॉलिसीज की भेंट चढ़ी फर्नेस इंडस्ट्री
लुधियाना की फर्नेस इंडस्ट्री के कारोबारी रविवार को दैनिक भास्कर के साथ अपनी समस्याओं को लेकर आयोजित मीटिंग में चर्चा करते हुए
मोिहत बहल | लुधियाना mohit.behl@dbcorp.in
इंडस्ट्रियलकंजम्पशन के लिए इंगट, राउंड फ्लैट आदि जैसे अहम प्रोडक्ट्स बनाने वाली लुधियाना की फर्नेस इंडस्ट्री की कभी पूरे उत्तर भारत में तूती बोलती थी। पंजाब के साथ हरियाणा, हिमाचल, जेएंडके, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत अन्य राज्यों से कारोबारियों को बड़ी संख्या में आर्डर मिलते थे। लुधियाना में 5 साल पहले तक फर्नेस इंडस्ट्री के छोटे बड़े 48 यूनिट्स हुआ करते थे जिनमें 35 फीसदी बंद हो चुके हैं। आज फर्नेस कारोबारी बैंकों की लिमिट का ब्याज और बिजली का मिनिमम चार्ज देने के लिए अपनी फैक्ट्रियां घाटे में चलाने को मजबूर हैं। अब उनके पास और उद्यम करने को पूंजी भी नहीं है। फर्नेस इंडस्ट्री बैंकों की नेगेटिव लिस्ट में होने से या तो बैंक नया लोन नहीं देते या फिर मोटा ब्याज मांगते हैं।
लुधियाना के जाने माने फर्नेस कारोबारियों के अनुसार उनकी ऐसी हालत के लिए राज्य सरकार के डिपार्टमेंट्स की पॉलिसीज सबसे बड़ा कारण हैं। ये बात कारोबारियों ने दैनिक भास्कर के साथ एक मीटिंग के दौरान कही। उनका कहना है कि जितनी मार पावरकॉम एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट ने फर्नेस इंडस्ट्री को मारी है उससे तो अब इंडस्ट्री का दोबारा खड़ा हो पाना असंभव है। एक्साइज एंड टैक्सेशन की फर्नेस इंडस्ट्री से बिजली की कंजम्पशन के हिसाब से वैट वसूलने वाली पाॅलिसी से भी कारोबारी नाराज हैं। इसके कारण बहुत सी फर्नेस बंद हो गई हैं। एक्साइज एंड टैक्सेशन की ईट्रिप पालिसी के कारण भी लुधियाना की फर्नेस इंडस्ट्री से दूसरे राज्यों की इंडस्ट्री ने माल मंगवाना बंद कर दिया है। अगर सरकार ने इन सब समस्यायों को दूर करने के कदम नहीं उठाए तो वो दिन दूर नहीं जब लुधियाना से फर्नेस इंडस्ट्री का वजूद खत्म हो जाएगा।
पांच सालों में लुधियाना की 35 फीसदी फर्नेस हो चुकी हैं बंद और कई बंद होने की कगार पर
पावरकॉम बनाए स्पेशल टैरिफ
प्रदेशऔर केंद्र की नीतियों से हमारी इंडस्ट्री की ग्रोथ तो बहुत दूर, अब तो केवल 30-32 वर्किंग फर्नेस रह गई हैं लुधियाना में। पावरकॉम हमसे बड़ी इंडस्ट्री जैसे टैरिफ चार्ज कर रहा है। हिमाचल, हरियाणा जैसे राज्यों में भी फर्नेस इंडस्ट्री स्थाप