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जैन स्थानक अग्र नगर में ध्यान शिविर में धार्मिक सभा का आयोजन

7 वर्ष पहले
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जैन स्थानक अग्र नगर में आयोजित ध्यान शिविर में भाग लेने पहुंचे श्रद्धालु। फोटो : भास्कर

\\\"शरीर धर्म साधना का प्रथम साधन\\\'

लुधियाना |जैन स्थानक सिविल लाइंस में आयोजित प्रवचन सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आगम ज्ञाता उपाध्याय प्रवर जितेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि अहिंसा भगवती की अराधना करना प्रत्येक श्रावक श्राविका, साधु-साध्वी के परम आवश्यक है। सारे व्रत नियम, प्रत्याख्यान अहिंसा के लिए है। अहिंसा की सुरक्षा के लिए ही सभी व्रतों, अणुव्रतों महाव्रतों को अपनाया जाता है। जितेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि अभयदान सबसे बड़ा दान है। उन्होंने कहा कि अहिंसा आत्मा में पापों को आने से रोकने वाली मन की शुद्धि करने वाली है। अहिंसा परम पावन ज्ञान का प्रकाश और आत्मा का विकास करने वाली है। महाराज ने कहा कि अहिंसा का पालन करने वाले का यश कीर्ति फैलती है और यह पाप रूपी ज्वर को उतारने वाली होती है।



भास्करन्यूज |लुधियाना

जैनस्थानक अग्र नगर में आयोजित ध्यान शिविर के सातवें दिन डॉ. पदम मुनि शास्त्री ने कहा कि शरीर धर्म साधना का प्रथम साधन है। इसे बाधक बनने दें। हम लोगों में से अधिकतर लोग ऐसे हैं, जो शरीर की सच्चाई को नहीं जानते।

इसके परिणाम स्वरूप हम शरीर के द्वारा धर्म साधना का लाभ नहीं ले पाते हैं। प्रभु महावीर ने भी शरीर को परिवर्तनशील और अनित्य बताया है। हम इतना तो जानते हैं कि शरीर बदलता है, परंतु उसके बदलने की अनुभूति हमें नहीं होती। इस अनुभूति के लिए ध्यान साधना का सहारा लिया जाता है। पदम मुनि महाराज ने कहा कि मानव का स्वभाव है कि वह जिससे परिचित हो जाता है, उससे राग कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर शरीर केंद्रित दृष्टि ने मानव को दानव बना दिया, तो आत्म केन्द्रित दृष्टि मानव को परमात्मा भी बना देती है। प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की ताकत है। आवश्यकता बस उसे जगाने की है। ध्यान साधना ही उसे जगा देती है। ध्यान शिविर के दौरान पदम मुनि महाराज ने साधकों को अंर्तयात्रा का अभ्यास करवाया। इसमें साधकों ने जाना कि शरीर के भीतरी अंगों पर कैसे अनुशासन किया जाए।

शरीर के बाहरी अंगों पर हमारा थोड़ा बहुत वश चलता है, किंतु भीतरी अंगों पर हमारा वश नहीं चलता। वे हमारे किसी आदेश को नहीं मानते। अत: हमें अंतर्यात्रा का अभ्यास करके समग्र शरीर पर अनुशासन करना चाहिए। इस दौरान पदम