- Hindi News
- गलाडा का इंडस्ट्रियल पार्क ड्राॅप, किसानों की 1599 एकड़ जमीन फंसी
गलाडा का इंडस्ट्रियल पार्क ड्राॅप, किसानों की 1599 एकड़ जमीन फंसी
महाबीर जायसवाल/िवशाल कपूर | लुधियाना
लुधियाना-चंडीगढ़हाइवे और लुधियाना-दिल्ली हाइवे के बीच 1599 एकड़ जमीन में बनने वाले इंडस्ट्रियल पार्क को सरकार ने ड्राॅप कर दिया है। इससे तो साहनेवाल एयरपोर्ट का विस्तार हो सकेगा और ही इंडस्ट्रियलिस्ट्स को इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट मिल सकेगा। ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गलाडा) के इस प्रोजेक्ट को ड्राॅप करने के पीछे फंड का अभाव बताया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 3500 करोड़ रुपए खर्च होने थे।
प्रोजेक्ट ड्राॅप होने से नौ गांवों के किसानों की जमीन फंस गई है। किसान तो अपनी जमीन बेच सकते हैं और ही उस पर कोई लोन ले सकते हैं। क्योंकि गलाडा ने सेक्शन-4 का नोटिस जारी कर इसे प्रोजेक्ट के लिए आरक्षित कर रखा है। गलाडा ने नौ गांवों की 2106.676 एकड़ एक्वायर करने के लिए नोटिस निकाला। लेकिन बाद में 517.676 एकड़ जमीन प्रोजेक्ट से बाहर निकाल दिया गया था। इस प्रोजेक्ट के लिए अब 1599 एकड़ जमीन ही गलाडा के पास थी। गलाडा के एसीए कुलदीप सिंह वैद्य कहते हैं कि डि-नोटिफाई में वक्त लगेगा। तब तक रेवेन्यू रिकार्ड में में ये जमीन गलाडा के प्रोजेक्ट के नाम पर ही दर्ज रहेगी।
प्रोजेक्ट में 1500 एकड़ जमीन को एक्वायर कर करीब 300 एकड़ जमीन सिविल एविएशन डिपार्टमेंट को सौंपना था। इस जमीन में साहनेवाल एयरपोर्ट को विस्तार किया जाना था। इससे एयरपोर्ट के आस-पास के गांव की जमीन को शामिल किया गया था।
इस प्रोजेक्ट के लिए गलाडा ने 2013 में सेक्शन-4 के तहत नोटिस निकाला था। इसमें उन किसानों से आपत्तियां मांगी थी, जिनकी जमीन एक्वायर की जानी थी। आपत्तियों के बाद गलाडा ने सेक्शन-5 जारी कर दिया। सेक्शन -5 की धाराओं में किसानों की आपत्तियों की सुनवाई और उन्हें सेटलमेंट किया गया।
नत पिंड ------- 358.338 एकड़
धारोड़ --------- 81.125 एकड़
लोहारा -------- 171.647 एकड़
जसपाल बांगर -- 499.585 एकड़
गरीब नगरी ---- 455.438 एकड़
हरनामपुरा ----- 198.848 एकड़
पावा ---------- 121.200 एकड़
ब्राह्मण माजरा --- 195.505 एकड़
संघोवाल ------- 24.99 एकड़
^सरकार के आदेश पर इंडस्ट्रियल पार्क का खाका तैयार किया गया था। अब सरकार ने इसे ड्राप कर दिया है। जिससे अब इस प्रोजेक्ट पर गलाडा ने काम बंद कर दिया। किसानों की जमीन वापस करने के लिए डि-नोटिफाई किया जाएगा, इसमें