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ड्रॉर की चाबी ले गया पियन, 55 मिनट तक नहीं बने एफिडेविट
मिनीसेक्रेटेरिएट स्थित एफिडेविट सुविधा सेंटर में पियन कैमरों काे टेबल के ड्रॉर में रखकर ताला लगा छुट्टी पर चला गया। इससे सोमवार सुबह 55 मिनट तक एफिडेविट बनाने का काम ठप रहा। दो छुट्टी के बाद सोमवार को दफ्तर खुलने से पब्लिक काफी तादाद में वहां जमा थी। पब्लिक भड़की तब भी प्रॉब्लम को सीरियसली नहीं लिया गया।
वैकल्पिक व्यवस्था करने की जगह वहां तैनात मुलाजिम छुट्टी पर गए पियन के पास चाबी होने की बात कहकर किनारा करते रहे। बाद में कंपलेंट जब सुविधा एडमिनिस्ट्रेटर जरनैल सिंह तक पहुंची तो उन्होंने डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को तुरंत ताला तोड़कर कैमरा निकालने और काम शुरू करने को कहा। इसके बाद 9 बजकर 55 मिनट पर काम शुरू हो सका। डेली यहां लगभग 300 से ज्यादा एफिडेविट बनते हैं।
एफिडेविटपर लगती है फोटो:
यहांतहसीलदार से अटेस्ट होने वाले जाे एफिडेविट बनते हैं, उनके पीछे एप्लीकेंट की अकेले या वकील के साथ फोटो लगती है जो इन कैमरों से खींची जाती है।
कैमरेके साथ मुहर भी पियन के जिम्मे: हैरतकी बात यह है कि जिस ड्रॉर में कैमरे थे, उसी में एफिडेविट पर लगने वाली सरकारी मुहर भी रखी थी। लापरवाही की हद यह कि सरकारी मुहर की कस्टडी भी पियन गुरबचन के हवाले कर दी गई, जबकि उसका काम सिर्फ एफिडेविट पर तहसीलदार से साइन करवाकर लाना है। बड़ा सवाल यह है कि कैमरे मुहर वाले ड्रॉर की चाबी सुविधा सेंटर के ऑफिस में होने की जगह पियन को क्यों दे दी गई?।
दूसरीलापरवाही, नहीं कोई कार्रवाई: एफिडेविटसेंटर पर कामकाज को लेकर यह दूसरी लापरवाही सामने अाई है। इससे पहले \\\"दैनिक भास्कर\\\' तीन डाटा एंट्री ऑपरेटर्स संगीता, वंदना और शिल्पा के काम के वक्त धूप सेंकने और पियन गुरबचन से एफिडेविट बनवाने का खुलासा कर चुका है। हालांकि मामला सुविधा सेंटर के कामकाज की मॉनीटरिंग करने वाले इंचार्ज जरनैल सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर (जी) कनु थिंद, एडीसी डेवलपमेंट सुप्रीत गुलाटी और डीसी रजत अग्रवाल तक पहुंच चुका है लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं हुआ।
पब्लिक बोली
^किसके पास जाएं? कोई बात ही नहीं सुनता यहां। मुलाजिम सीधे मुंह बात नहीं करते। पता नहीं पब्लिक ने इनका क्या बिगाड़ा है जो सही ढंग से जवाब भी नहीं देते। -कंवलजीतसिंह, फील्डगंज
^ कोई सुनवाई नहीं होती यहां। कोई बता भी नहीं रहा कि एफिडेविट का काम बंद क्यों है? क्या कोई सीनियर अफसर यहां