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मुर्गियों को बीमारी से बचाने का इंजेक्शन तैयार करेगा गडवासू
मुर्गियोंमें रानीखेत की बीमारी बढ़ती जा रही है। इससे मुर्गियों की मौत की दर बढ़ती ही जा रही है। मुर्गियों की मौत की दर को कम करने और फाॅर्मर को नुकसान से बचाने के लिए बायोटेक्नोलॉजी विभाग इंजेक्शन तैयार करेगा। गुरु अंगद देव वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी के स्कूल आॅफ एनिमल बाॅयोटेक्नोलॉजी को टीका तैयार करने का प्रोजेक्ट मिला है। डायरेक्टर डॉ. रमनीक ने बताया कि इस बीमारी पर काबू पाने के लिए विभाग को एक नया खोज प्रोजेक्ट मिला है। यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के बाॅयोटेक्नोलॉजी विभाग को सौंपा गया है। इस संबंधी 25 लाख रुपए की खोज ग्रांट प्राप्त हुई है। इस प्रोजेक्ट को वेटरिनरी यूनिवर्सिटी के अतिरिक्त केंद्रीय कृषि यूनिवर्सिटी इंफाल, मिजोरम में भी चलाया जाएगा। डॉ. रमनीक ने बताया कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए मुर्गियों का टीकाकरण किया जाता है। बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु को कमजोर करके उनको टीके की तरह किया जाता है। इन इंजेक्शंस की शक्ति और कैपेसिटी बढ़ाने के लिए जीवाणु के साथ अन्य तत्व भी मिलाए जाते हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत नई तकनीक के सात ऐसे पदार्थों की तालाश की जाएगी जो कि मुर्गी को इस बीमारी से अधिक समर्थ तरीके से बचाएंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए सीएस मुखोपाध्याय को मुख्य निरीक्षक नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यहां एमएससी और पीएचडी की डिग्री करवाई जा रही है। वहीं शिक्षा के खोज पशु बीमारियों पर अच्छे इलाज के लिए तैयार की जा रही है। इसके चलते पशु से जुड़ी मनुष्य सेहत को भी बेहतर करने के लिए फायदा मिलता है।