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एक साल बाद भगाेड़ा कैदी याद आया, दर्ज किया पर्चा
भाईरणधीर सिंह नगर में दंपति की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी एक साल पहले पैरोल पर छुट्टी के दौरान भगोड़ा हो चुका है। वह सेंट्रल जेल लुधियाना से चार हफ्ते की पैरोल काटने के लिए घर गया था। इसके बाद जेल वापस नहीं पहुंचा। एक साल से सेंट्रल जेल के अफसर पुलिस को बार-बार रिमाइंडर निकाल कर पर्चा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। आखिरकार एक साल बाद वीरवार को पुलिस की नींद खुली। डिवीजन नंबर तीन पुलिस ने भगौड़े कैदी के खिलाफ केस दर्ज किया है।
यहां बता दें कि अभी तक सेंट्रल जेल लुधियाना से 42 कैदी पैरोल छुट्टी जाने के बाद वापस नहीं लौटे हैं। इन भगौड़े कैदियों को पुलिस गिरफ्तार में नाकामयाब रही है।
2006में की थी हत्या: भाईरणधीर सिंह नगर ब्लॉक स्थित हाउस नंबर 115 में जीत सिंह साहनी और उनकी प|ी जसवीर कौर बुटीक चलाते थे। 5 मार्च 2006 की रात एक व्यक्ति ने तेज हथियार से दोनों को मौत के घाट उतार दिया था। थाना सराभा नगर पुलिस ने उनके पड़ोसी के बयान पर गुलचमन गली, बामरू मोहल्ला के रहने वाले राजेश के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। पुलिस थ्योरी के मुताबिक आरोपी राजेश उनके घर में चोरी के इरादे से घुसा था। पकड़े जाने पर उसने दोनों को मौत के घाट उतार दिया था। 31 मार्च 2009 में लुधियाना अदालत ने केस पर सुनवाई करते आरोपी राजेश कुमार को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी सजा काट रहा था।
पैरोलपर आया था घर: जिलामजिस्ट्रेट लुधियाना के आदेश नंबर 10721/पीबी दिनांक 4 जून 2013 के मुताबिक राजेश को चार सप्ताह की पैरोल पर केंद्रीय जेल से रिहा किया गया था। यह पैरोल छुट्टी उसे परिवार के सदस्यों के मिलने के लिए दी गई थी। तीन जुलाई 2013 को राजेश ने वापस सेंट्रल जेल लुधियाना पहुंचना था, लेकिन नहीं पहुंचा।
सेंट्रल जेल सुपरिंटेंडेंट एसपी खन्ना ने पुलिस कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर लुधियाना को कार्रवाई के लिए पत्र लिख दिया था। इसके बाद हर महीने पुलिस को केस दर्ज करने का रिमांइडर भेजा जा रहा था, ताकि भगोड़े राजेश के खिलाफ केस दर्ज हो सके और इसकी सूचना डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (जेल) को भेजी जा सके।
^ यह इश्यू मेरे ध्यान में है। मैं अभी इस मामले पर कुछ नहीं कह सकता हूं। फिर भी इस मामले की जांच की जाएगी कि आखिरकार एक साल तक यह मामला क्यों लटकता रहा है। -प्रमोदबान, पुलिसक