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कर्म रहित आत्मा परमात्मा है : जितेंद्र मुनि
जैनस्थानक सिविल लाइंस में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन सभा में श्रावकों को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर जितेन्द्र मुनि महाराज ने कहा कि भगवान के उपदेश का सार है नवतत्व।
नव तत्वों का ज्ञान होगा तो सामयिक, प्रतिक्रमण ध्यान भी उत्तम होगा। उन्होंने कहा कि व्यवहार समकित के 63 बोलों में पहला बोल परमार्थ का परिचय प्राप्त करें। आत्मा का शुद्ध स्वरूप अनंत ज्ञान संपन्न है। परमार्थ का ज्ञान प्राप्त करें। एक परमात्मा सिद्ध है, एक अरिहंत है। एक भावी परमात्मा हैं जो उस मार्ग की ओर बढ़ रहे हैं। कर्म रहित आत्मा परमात्मा है। महाराज ने कहा कि कर्मों के बंधन तोड़ने पड़ते हैं। तप के द्वारा, साधना के द्वारा। जितेंद्र मुनि महाराज ने कहा कि हमारा धर्म के प्रति उत्साह होना चाहिए।
प्रवचन करते जितेंद्र मुनि महाराज