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साजन रायकोटी को अपने भूले, शागिर्दों ने किया याद

7 वर्ष पहले
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किसीवक्त नैन प्रीतो दे बैह्जा-बैह्जा कर दे...जैसे धूम मचाने वाले गीत ने रातों-रात पंजाबी सिंगर रमेश रंगीला को चर्चित कर दिया था। इसी गीत को लिखने वाले शख्स थे साजन रायकोटी। मगर अफसोस मौत के फौरन बाद सबने उनको भुला दिया। तमाम मशहूर गीत लिखने के साथ ही गायकी में भी अच्छी पहचान बनाने वाले साजन के गीत गाकर कई गायकों ने खूब नाम कमाया। उन्हीं गायकों ने सन 2003 में 14-15 जुलाई की रात दुनिया से अलविदा हुए साजन के भोग पर उनकी यादगार कायम रखने के तमाम वादे-दावे किए थे। जब दस साल बाद भी वो कस्में-वादे पूरे हुए तो इस संगीत जगत के साजन के शागिर्द आगे आए। पिछले साल उन्हीं जमीनी गायकों गीतकारों ने अपने उस्ताद की याद में शहर के डाबा इलाके में सभ्याचारक मेला लगाया था। इस साल उसी रवायत को आगे बढ़ाते हुए संडे की शाम, साजन के नाम की गई।

शागिर्दोंकी पहल पर मशहूर गायक मदद को आगे आए : इलाकेके एक प्राइवेट स्कूल के कैंपस में यह संगीत-प्रोग्राम कराने वालों ने साजन की बुजुर्ग प|ी दर्शना रानी उनके बेटे बाबा बिट्टू शाह को सम्मानित किया। जज्बाती हुए बिट्टू ने सवाल किया कि मेरे पिता की याद में उनके जन्मस्थान रायकोट में बुत लगवाने और लुधियाना में आंखों का अस्पताल बनवाने जैसे वो दावे क्या हुए, जो उन नामवर गायकों ने किए थे, जो मेरा पिता के लिखे गीत गायकर मशहूर हुए? इतना जरूर है कि साजन के शागिर्दों ने इस मौके पर मशहूर गायक के दीप और सुरिंदर छिंदा को बुलाकर यह साबित किया कि वो सब तो अपने उस्ताद के कद्रदान हैं। हकीकत पता चली तो इन दोनों मशहूर गायकों के साथ गुरप्रीत बिट्टू पुनीत कुमार ने साजन की प|ी दर्शना रानी को आर्थिक मदद भी सौंपीं। प्रोग्राम कराने वाले कद्रदान गायकों-गीतकारों में रछपाल सागर, भीम सिंह, बलविंदर सिंह बंटी, जरनैल सिंह, दिलबाग सिंह सिमको म्युजिक कंपनी के जसनप्रीत शामिल रहे।

साजन के चर्चित गीत

आजभी साजन रायकोटी के लिखे कई मशहूर गीत बुजुर्गों को भी जवानी की याद दिला देते हैं। जैसे- नैन प्रीतो दे वैह्जा-वैह्जा कर दे.... औनू दिल भी दियांगे, नच्ची जो साड्डे नाल.... ऐवें ना लड़इया कर ढोला, कुंड विच नइ लुकणें सजना नैन क्वारे...

...और बेवफाई रायकोट वापस लाई

रायकोटमें जन्मे साजन रायकोटी की प|ी दर्शना रानी उनकी मौत के वक्त लुधियाना में रहती थीं। जब पति का साथ छूटने के एक साल ब