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\"डीटीओ दफ्तर अग्गे , एेह डीटीओ दफ्तर नईं\'

7 वर्ष पहले
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मनीष शर्मा| लुधियाना manish.sharma4@dbcorp.in

\\\"पुछगिछतां छड्डो जी, लोकी आके साड्डे गल पैंदे ने, सानूं आउंदे ही केहंदे हन कि साड्डा कम्म नईं हुंदा, तुसी कोई जवाब नईं दिंदे?, जदकि साड्डा डीटीओ दफ्तर नाल कोई लेणा-देणा ही नईं, हुण तुसी दस्सो के अपणा कम्म करिए कि बिना किसे गल दे लोकां नाल लड़दे फिरिए\\\', यह परेशानी बयां की डीसी दफ्तर के एक मुलाजिम ने। जो डीटीओ ऑफिस के मुलाजिम समझे जाने पर अकसर लोगों के निशाने पर जाते थे।

इस मुलाजिम ने कहा कि \\\"जदों परेशानी वध गईं तां असी कमरे दे बाहर लिखके ला दित्ता कि \\\"डीटीओ दफ्तर अग्गे है\\\' \\\"ऐ डीटीओ दफ्तर नहीं है\\\'।

डीटीओ का ऑफिस बिखरा हुआ है। कुछ कमरे ग्राउंड फ्लोर पर तो तीन कमरे बेसमेंट दफ्तर में हैं। हर जगह अलग काम करने वाले क्लर्क बैठे हैं। किसी भी कमरे के बाहर नहीं लिखा है कि यह डीटीओ ऑफिस का हिस्सा है। सूत्रों की मानें तो मुलाजिम इससे परहेज करते हैं ताकि उनके कमरे में कोई तांकझांक सके। इससे लोग ही नहीं बल्कि मुलाजिम भी परेशान हो रहे हैं।

मजेदार बात यह है कि डीटीओ ऑफिस आने के लिए जहां से रास्ता है, वहीं दो टूक लिखकर चिपका दिया है कि यह डीटीओ दफ्तर नहीं है। चाहे वो बेसमेंट में एसडीएम दफ्तर का रास्ता हो या वकीलों और टाइपिस्टों के बैठने वाली कचहरी का। सबने अपने कमरे के बाहर लिखकर लगा दिया है। कोई पूछने आता है ताे जुबान खोलने की जगह हाथ से इशारा कर दिखा देते हैं।

जीपीएफ ब्रांच के बाहर िचपका नोिटस।

^सिर्फ डीटीओ और एडीटीओ नेम प्लेट लगी है। बाकी क्लर्कों का तो पता ही नहीं चलता कि कहां कौन बैठा है। काफी परेशानी होती है। डीसी ऑिफस की तरह सबके बाहर नेम प्लेट होनी चाहिए। -टिंकू अरोड़ा, पुरानाबाजार

^लोग यहां फुटबॉल बने रहते हैं। कोई इधर भेजता है कोई उधर। कोई कहता है यह डीटीओ दफ्तर नहीं तो कोई कहता है हमारे पास ये काम नहीं। चक्कर काट-काट कर सिर पैरों में दर्द होने लगता है। निर्मलकैड़ा, लुधियानाभलाई मंच

मुलािजमों को काम के अलॉटमेंट का भी यहां पता नहीं चलता। चूंकि आरसी, डीएल, टैक्स, नंबर आदि काम अलग-अलग क्लर्क के पास हैं लेकिन इसकी जानकारी सिर्फ प्रिंटआउट निकालकर चिपका खानापूर्ति की है।

नए कमरे बनाने के बाद भी डीटीओ ऑफिस में अव्यवस्था का आलम है तो उधर डीसी रजत अग्रवाल लगातार सुधार में जुटे हैं। डीसी अच्छी व्यवस्था वाले दफ्तरों को