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स्टेनो समेत आठ पर केस दर्ज, तीन एजेंट्स गिरफ्तार
डीटीओऑफिस अौर स्मार्टचिप कंपनी के मुलाजिमों की मदद से एजेंट्स ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का गोरखधंधा कर रहे थे। इसमें तीन डॉक्टर भी शामिल थे, जो बिना एपलीकेंट के आए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देते थे। विजिलेंस जांच में इसका खुलासा हुआ है।
इसके बाद डीटीआे दफ्तर के स्टेनो बलजिंदर सिंह, डीएल बनाने वाली कंपनी स्मार्टचिप कंपनी के मुलाजिम विनोद सहगल उर्फ विक्की, एजेंट्स देशराज उर्फ राज, राजीव गुप्ता और सुनील सूद और डॉ. पीएस गुलाटी, डॉ. अशोक अग्रवाल और डॉ. संतोख सिंह पर केस दर्ज कर लिया है। तीनों एजेंट्स को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विजिलेंस ब्यूरो के एसएसपी सतिंदर सिंह ने बताया कि स्मार्टचिप कंपनी के पास ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कॉन्ट्रेक्ट है। यहां तैनात कंपनी मुलाजिम विनोद सहगल उर्फ विक्की ने देशराज उर्फ राज को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए एजेंट रखा था। जो सीधा लोगों या दूसरे एजेंट्स से डीएल के आवेदन ले लेता था। फिर सरकारी फीस ज्यादा रुपये लेकर बिना देरी के लाइसेंस बनाकर दे देते थे। ड्राइविंग लाइसेंस के फार्म अधूरे होने के बावजूद एजेंट्स एपलीकेंट के गए बिना ही डॉक्टर्स से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट इश्यू करवा लेते थे। यह पैसे आगे विनोद सहगल उर्फ विक्की को दिए जाते थे और इस काम में डीटीओ ऑफिस का स्टेनो बलजिंदर सिंह इनकी मदद करता है। जांच में पता चला कि फिटनेस पर साइन करने वाले कई डॉक्टर तो ट्रेस ही नहीं हुए, उनका एड्रेस भी झूठे निकले।
चीफ सेक्रेटरी और पंजाब गवर्नेंस रिफोर्मस के डायरेक्टर सर्वेश कौशल ने 20 जून को सुविधा सेंटर की चैकिंग में एजेंट राज से 64 फाइलें पकड़ी थीं, जो ड्राइविंग लाइसेंस की थीं। उन्होंने यह रिकॉर्ड विजिलेंस ब्यूरो को जांच के लिए सौंप दिया था। जांच के बाद बुधवार को आरोपियों पर धोखाधड़ी और एंटी करप्शन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।