- Hindi News
- वाजपेयी जी ने तुरंत कर दिया था तीन पंजाबी गजलों का हिंदी अनुवाद
वाजपेयी जी ने तुरंत कर दिया था तीन पंजाबी गजलों का हिंदी अनुवाद
कौशल सिंह|लुधियाना kaushal.singh@dbcorp.in
\\\"पहली बार दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी जी से मुलाकात हुई। मैं 1993 में एक शिक्षा के क्षेत्र दिए जा रहे एक सम्मान समारोह के दौरान उनसे मिली थी। बातों ही बातों में उन्हें पता चला कि मैं पंजाबी गजलें लिखती हूं। बोले, मुझे अपनी गजल सुनाओ। मैं एक के बाद एक तीन गजल उन्हें लगातार सुनाती रही और वे मौके पर ही उन गजलों का हिन्दी में अनुवाद करते रहे। लिखती तो मैं काफी पहले से थी, लेकिन वाजपेयी जी ने जब तारीफ की तो लगा मेरी लेखनी में वाकई कुछ वजन है। तारीफों के बाद फिर शुरू हुआ सम्मान का सिलसिला और अब तक मुझे 100 से ज्यादा बार शिक्षा, साहित्य और सोशल एक्टिविटी के लिए सम्मानित किया जा चुका है। शुक्रवार को ही नागपुर में डॉ. अमृता प्रीतम लिट्रेसी अवॉर्ड मिलने के बाद मैं वापस लुधियाना लौटी हूं।\\\'
हर बोल अनुभव की ताकीद बयां करता और करनी के साथ लेखनी से मिले सम्मान की धरोहरों से सजी कमरों की आलमारियां इनकी कहानी की सच्चाई बयां कर रही थीं। 7 सितंबर के दिन गुरशरण कौर कोचर नागपुर में डॉ. अमृता प्रीतम लिट्रेसी नेशनल अवॉर्ड पाने के बाद बीआरएस नगर, 464-बी स्थित अपने घर पहुंची थीं। उम्र के साथ कोचर की ख्वाहिशें भी कुछ अलहदा हैं, उनकी ही एक गजल में बयां करें तो...
\\\"मैंचाहती हूं, मोहब्बत का खिले गुलजार हर तरफ,
जिधर देखूं नजर आए दिलों का प्यार हर तरफ।
मोहब्बत की इबारत भी बने पूजा इबादत भी,
अमन के ही पुजारी हों दावेदार हर तरफ।\\\'
6 किताबें हुई हैं पब्लिश
करीब22 सालों से साहित्य, सामाजिक सरोकार और शिक्षा जगत को योगदान दे रहीं कोचर की अब तक 6 किताबें पब्लिश हो चुकी हैं। गजल संग्रह अहसास दी खुशबू उनके द्वारा लिखा गया सबसे पहला गजल संग्रह है। इसके अलावा अहसास दा सफर, दीवियां दी कतार और जगदे चिराग समेत कई अन्य गजल संग्रह पंजाबी साहित्य की प्रशंसनीय कृतियों में शामिल हैं।
गुरुशरण कौर कोचर अवार्ड दिखाती हुईं।
साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए गुरशरण कौर कोचर को नागपुर में डॉ. अमृता प्रीतम लिट्रेसी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।