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सड़कों पर घूमने वाले बच्चे सुनाते हैं बच्चन की कविताएं

7 वर्ष पहले
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मंजू कपूर|लुधियाना ldh.bhaskar@gmail.com

कोशिशकरने वालों की कभी हार नहीं होती। नन्ही चींटी जब दाना लेकर जब चलती है गिरती है सौ बार और फिर संभलती है। असफलता एक चुनौती है उसे स्वीकार करो, क्या कमी रह गई है उसे सुधार करो। हरिवंश राय बच्चन की ये कविता वे बच्चे सुनाते हैं जो कभी बिना लक्ष्य सड़कों पर घूमते थे।

श्री दुर्गा माता मंदिर बीआरएस नगर के हाल में पिछले दो वर्ष से गांव सुनेत, शाम नगर और मंदिर के आसपास सड़कों पर घूमने वाले बच्चे पढ़ रहे हैं। मंदिर के प्रधान शमशेर बख्शी बताते हैं कि नोबल फाउंडेशन के सहयोग से इन बच्चों को समझा कर पढ़ाने को मनाया गया। मंदिर के हाल में कक्षा के लिए जगह दी गई। शुरू में 30 बच्चों की कक्षा लगती थी। आज स्कूल में चार टीचर्स इंचार्ज अंजली राणा समेत अजीत कौर, रजनी, प्रितपाल कौर 250 बच्चों को पढ़ा रही हैं। अंजली बताती हैं कि पहले दिक्कतें आईं पर अब ये बच्चे बच्चन और रामधारी सिंह दिनकर की कविताएं सुनाते हैं। स्कूल की को-आॅडिनेटर मीनाक्षी शर्मा बताती हैं कि स्कूल में सभी आयोजन होते हैं जिनमें ये बच्चे स्पीच भी देते हैं। मंदिर की प्रबंधक कमेटी के सहयोग से 250 बच्चों का जीवन संवर रहा है। इनके पेरेंट्स पढ़ लिख नहीं पाए, लेकिन अब बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके प्रयास भी सराहनीय हैं। टीचर्स भी मंदिर के बाहर फालतू घूमते बच्चे को पढ़ने को मना लेती हैं। पढ़ने में इन बच्चों की लगन देख मंदिर की प्रबंधक कमेटी की ओर से स्कूल के लिए छह कमरे बनाए जा रहे हैं। इनका उद्घाटन दूसरे नवरात्र में किया जाएगा।

दुर्गा माता मंदिर बीआरएस नगर हाल में खोले गए स्कूल में िबना लक्ष्य सड़कों पर घूमने वाले बच्चे पढ़ाई करने के बाद कविताएं सुनाते हुए। फोटो: भास्कर

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