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गुरु विजयानंद का भारतीय संस्कृति में है विशिष्ट स्थान
ड्यूकपरिवार द्वारा प्रकाशित पुस्तक जैनाचार्य विजयानंद सुरीश्वर जी महाराज के संक्षिप्त जीवन परिचय, कार्य, सिद्धांत, एवं भजन, आचार्य पूज्य गच्छाधिपति श्री विजय र|ाकर सूरी जी, पूज्य श्री नयपदम सागर जी महाराज एवं पूज्य आचार्य श्री नित्यानन्द जी महाराज को मुंबई में कोमल कुमार जैन (चेयरमैन, ड्यूक ग्रुप) ने भेंट की भारतीय संस्कृति में गुरु विजयानंद का विशिष्ट स्थान है। अजैन होते हुए भी उन्हें जैन समाज के युगद्रष्टा सुधारक एवं आचार्य बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। वह एेसे आचार्य हैं जिनकी मूर्ति को श्री शत्रुंजय तीर्थ पालीताना में स्थापित होने का गौरव प्राप्त है। ड्यूक परिवार द्वारा पहले भी ‘मेरी भावना’ एवं ‘भगवान महावीर’ के जीवन काम एवं सिद्धांत के विषय पर लघु पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी है। जोकि बहुत लोकप्रिय हुई। उसी कड़ी को आगे ले जाते हुए जैन आचार्य श्रीमद विजयानंद सुरीश्वर जी महाराज के जीवन परिचय, कार्य, सिद्धांत एवं भजन की यह पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक को सरल, सुबोध एवं नवीन शैली में लिखा गया है।
विजयानंद सुरीश्वर महाराज को पुस्तक भेंट करते कोमल कुमार और कंचन जैन।