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डॉक्टरों ने बचा दी जिंदगियां, पार्कों में रोजाना सैर से बढ़ रही उम्र

6 वर्ष पहले
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ब्रेन अटैक से हुआ पैरालिसिस, सैर से ठीक

संपूर्णकॉलोनी में रहने वाले 60 साल के मास्टर सुरेश वर्मा बताते हैं कि 3 साल पहले ब्रेन अटैक हो गया। इससे शरीर के एक हिस्सा पूरी सुन्न यानी पैरालिसिस हो गया। डॉक्टर ने इलाज किया लेकिन असली फर्क सैर से ही पड़ा। मैं अस्पताल से घर आया तो हर राेज डेढ़ घंटा सैर करने लगा। मुश्किल होती थी लेकिन हार नहीं मानी। दवाई से ज्यादा तेज असर सैर से पड़ा। अब मैं दवाई खाता हूं लेकिन शरीर ठीक है। अब घूमने के साथ एक्सरसाइज और डिस्क थ्रो का गेम भी आसानी से खेल लेता हूं। मैं तो यही कहूंगा कि सुबह की सैर बड़ी बीमारियों का असर कम करने के साथ उन्हें खत्म करने में बड़ी कारगर है। छोटी बीमारियां तो वैसे ही दूर हो जाएंगी।

गिल रोड पर विश्वकर्मा चौक के पास रहने वाले 61 साल के शांति सरूप शेरा हर रोज की सैर से हार्ट प्रॉब्लम को हरा रहे हैं। वो बताते हैं कि 2 साल पहले अचानक सीने में दर्द होने के साथ पसीना छूटने लगा। घर के लोगों ने कहा कि हार्ट अटैक हो गया। डॉक्टर ने अपना इलाज किया। मगर, मुझसे ज्यादा देर बिस्तर पर नहीं रहा गया। डॉक्टर ने कहा स्टेंट पड़ेंगे, लेकिन मैने जबरन छुट्टी करवाई और फिर अगले दिन से सैर करने गया। तब से हर रोज सैर कर रहा हूं। अब चैकअप करवाता हूं और ईसीजी टेस्ट भी होता है लेकिन सब कुछ नॉर्मल है। काफी राहत मिली है। अब मैं सैर एक्सरसाइज के साथ गेम्स भी खेल लेता हूं। शेरा बोले कि आपको आश्चर्य होगा कि इस उम्र में भी मेरी आंखें पूरी तरह से ठीक हैं। मैं डेली डेढ़ घंटा रखबाग में घूमता हूं।

मनीष शर्मा|लुधियाना, अगर आपके घर के सामने या नजदीक हरा-भरा साफ-सुथरा पार्क हो तो आप इसमें घूमकर हार्ट प्राब्लम और ब्रेन अटैक से पैरालिसिस जैसी बीमारियों को भी हरा सकते हैं। शहर के पार्कों में हर रोज ऐसे सैकड़ों लोग आते हैं जो जॉगिंग, वॉकिंग या फिर छोटे गेम्स खेलकर बीमारियां से पीछा छुड़ा रहे हैं। वो खुद भी मानते हैं कि डाॅक्टर आपकी जिंदगी बचा सकते हैं लेकिन अगर उम्र बढ़ानी है तो फिर डेली सैर करना जरूरी है।