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पार्टी, पंथ अते परकाश दा वी वड्डा नुकसान
मनीष शर्मा| तलवंडी राय (लुधियाना)
\\\"पार्टी,पंथ अते पंजाब दे नाल ऐह परकाश दा वी वड्डा नुकसान होया। जत्थेदार साब मेरे लई निजी तौर ते मजबूती दे स्रोत सन। ओहनां ने अपणे उसूलां नाल कदे वी समझौता नईं कीता। लोक मुद्दियां नूं बेखौफ होके उठाउंदे सन जत्थेदार साब। जत्थेदार साब वरगी करिश्माई अते दृढ़ शख्सियत वाले बहुत घट लोक हुंदे हन।\\\' शनिवार को तलवंडी राय के सरकारी एलीमेंट्री स्कूल के ग्राउंड में अंतिम संस्कार के बाद सीएम परकाश सिंह बादल ने जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी को हमेशा के लिए खोने का दर्द जाहिर किया।
1 अप्रैल 2004 को पंथ र| गुरचरण सिंह टोहड़ा को खोने के बाद सीएम परकाश सिंह बादल ने दूसरे सबसे पुराने और करीबी साथी जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी को भी खोया तो उनके मुंह से वो जज्बात निकल रहे थे, जो जत्थेदारों और टकसाली वर्करों के दिलों में थे। तभी जब उनके मुंह से यह बातें निकली तो पीछे और आसपास खड़े जत्थेदार वर्कर सिर हिलाकर मूक हामी भर रहे थे। एक-दूसरे के कान में कह रहे थे कि \\\"वड्डी डूंगी गल्ल कीती बादल साब ने\\\'।
सीएम बादल बोले कि जत्थेदार साब पूरी जिंदगी खालसा पंथ की बुलंद आवाज बनकर डटे रहे। पंथक कद्रों-कीमतों के प्रति हमेशा दृढ़ रहे और इससे कभी समझौता नहीं किया। तभी उन्हें \\\"लौह पुरुष\\\' कहा जाने लगा। पंजाबी सूबा आंदोलन हो या एमरजेंसी अथवा धर्मयुद्ध मोर्चे, हर कठिन वक्त में खालसा पंथ और शिरोमणि अकाली दल की चड़दीकला के लिए डटकर पहरा दिया। जत्थेदार तलवंडी साब की जिंदगी और संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत होगा।
सीएम परकाश सिंह बादल वक्त के पाबंद माने जाते हैं। मगर बात जब उनके पुराने साथी जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी की थी, तो वो 11 बजे की जगह पौने 11 बजे ही हेलिकॉप्टर से तलवंडी राय पहुंच गए। फिर सीधे जत्थेदार तलवंडी के पैतृक घर गए। परिजनों से अफसोस जताकर वहीं जत्थेदार तलवंडी के अंतिम दर्शन किए।
घर से पार्थिव देह संस्कार के लिए सरकारी एलीमेंट्री स्कूल के ग्राउंड में पहुंची तो तुरंत सीएम परकाश सिंह बादल भी मौके पर पहुंच गए। वो संस्कार की सभी रस्में होने तक वहीं मौजूद रहे। सामने कुर्सी पर बैठकर अंतिम वक्त की सब रस्में देखी। दोपहर लगभग एक बजे के बाद वो वापस लौटे।