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छह घंटे तक कुर्सी पर बिठाए रखा गया हर्निया पेशेंट को
हर्नियाकी बीमारी से पीड़ित 65 साल का बुजुर्ग सुबह 8 बजे इमरजेंसी में भर्ती तो हो गया, लेकिन उसे लेटने को बेड नहीं दिया गया, जबकि खाली बेड था। इसके चलते वह छह घंटे तक कुर्सी पर बैठा रहा।
मीडिया की टीम उसके पास पहुंची तो स्टाफ ने 5 मिनट में ही उसे बेड दे दिया। सुआ रोड निवासी 65 साल के हंसराज सिंह को हर्निया की शिकायत है। वह सर्जन से इलाज कराने को शनिवार सुबह 8 बजे सिविल हॉस्पिटल गया था। उसके बेटे विजय कुमार ने बताया कि तब ओपीडी में डॉक्टर नहीं आए थे तो वे लोग सीधे इमरजेंसी में गए और यहां मौजूद डॉक्टर ने भर्ती करने को फाइल बना दी। फिर स्टाफ नर्स ने उसे इमरजेंसी में बेड देने की बजाय ऊपरी मंजिल पर सर्जिकल वॉर्ड में भेज दिया।
वहां के स्टाफ ने बेड देने की बजाय कुर्सी पर बैठाकर सर्जन का इंतजार करने को कहा। हंसराज सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक कुर्सी पर बैठे रहे। हंसराज को लगाई ड्रिप की बोतल पकड़कर विजय भी साथ की कुर्सी पर बैठा रहा।
दोपहर को अचानक मीडिया के लोग वहां पहुंचे और हंसराज से वहां बैठने का कारण पूछा तो स्वाइन फ्लू वार्ड में बने नर्सिंग स्टेशन पर मौजूद स्टाफ ने अपनी गलती मानने की बजाय उलटा उन्हें (हंसराज उसके बेटे को) ही डांटना शुरू कर दिया। इसके पांच मिनट बाद उसे सर्जिकल वार्ड में बेड नंबर 7 उपलब्ध करा दिया गया। बेड दिलाने वाले बहादुर सिंह ने पहले उन्हें बिना चादर के जंक लगे बेड पर लिटा दिया। जब उसे लगा कि मीडिया के लोग मौजूद हैं तो उसने बेड पर चादर भी बिछा दी।
^इस बारे में मुझे आपसे ही पता चल रहा है। इमरजेंसी में तैनात स्टाफ को चाहिए था कि अगर वह पेशेंट को ऊपर शिफ्ट कर रहा है तो उसे बेड भी दिलाकर आए। मैं सोमवार को इसकी जांच के लिए मैट्रन को कहूंगा। -डॉ.राजिंदर गुलाटी (एक्टिंगएसएमओ)।