फीस देने पर बहनों को स्कूल से निकाला
पेरेंट्सकोबच्चों की फीस चुकाने का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा कि उनके दोनों ही बच्चों के भविष्य पर ग्रहण लग गया। ये मामला है हैबोवाल कलां स्थित चूहड़पुर रोड के न्यू जीएमटी पब्लिक स्कूल का। संत विहार के रहने वाले मनोज कुमार को बढ़ रही फीस के खिलाफ खड़े होना इतना महंगा पड़ रहा है कि उनकी चौथी नौवीं क्लास में पढ़ने वाली दोनों ही बेटियों को एग्जाम में बैठने नहीं दिया जा रहा।
तीन सितंबर से स्कूल की फीस देने का कारण देकर इन दोनों ही बच्चियों को स्कूल मैनेजमेंट की ओर से निकाल दिया गया था। लेकिन अभी तक भी उन्हें स्कूल में आने की परमिशन नहीं दी गई है। पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से सोमवार सुबह स्कूल के बाहर धरना देकर इस मामले पर जब स्कूल मैनेजमेंट से बात की तब भी इसका कोई हल नहीं निकल पाया।
वहीं, जब इस संबंधी दैनिक भास्कर की ओर से स्कूल मैनेजमेंट से बात करनी चाही तो ही डायरेक्टर जसबीर सिंह थिंड ने ही स्कूल प्रिंसिपल मनजीत कौर से संपर्क हो पाया। चौथी क्लास में पढ़ने वाली मनोज कुमार की छोटी बेटी के जहां एग्जाम खत्म हो चुके हैं। वहीं, नौवीं क्लास में पढ़ने वाली उनकी बड़ी बेटी अपना पहला एग्जाम नहीं दे पाई।
मनोज कुमार ने बताया कि स्कूल मैनेजमेंट की ओर से बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके दोनों बच्चों को स्कूल से बाहर निकाल दिया गया। जबकि उन्होंने अगस्त से फीस देनी शुरू कर दी थी। पहले के कुछ महीनों की फीस वो देना चाहते थे इससे पहले ही बच्चों को क्लास से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि सेशन के शुरूआत में 200 पेरेंट्स ने फीस देकर उनका साथ दिया था। उन्होंने स्कूल मैनेजमेंट पर आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल मैनेजमेंट ने खुद ही माना है कि स्कूल के तकरीबन 400 पेरेंट्स ऐसे हैं जिन्होंने फीस नहीं दी है लेकिन इसके बावजूद भी केवल उनके ही बच्चों को बाहर निकाला गया है।
पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को स्कूल के बाहर धरना दिया गया। वहीं, एसोसिएशन के प्रधान राजिंदर घई ने स्कूल मैनेजमेंट से भी बात की। जिसमें कोई हल नहीं निकल पाया है। राजिंदर घई ने बताया कि स्कूल मैनेजमेंट की ओर से मंगलवार को दोबारा मीटिंग करने की बात कही गई है। जिसमें बच्चों के भविष्य का निर्णय होगा। पेरेंट्स की ओर से शिक्षा विभाग के साथ ही पुलिस विभाग डिप्टी कमिश्नर को भी अपनी शिकायत दी है। वहीं,