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प्रोफेसर ने कहा था, तू मुंबई जाकर गीत लिख और लिख डाला बेबी डॉल...

7 वर्ष पहले
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लुधियाना. मुझे पहले कभी नहीं लगा था कि मैं गीतकार बन सकता हूं। डीएवी कॉलेज में 1994 में पढ़ाई के दौरान मेरे प्रोफेसर अनुराग शर्मा ने शायद मजाक में ही कहा कि ‘तैनूं मुंबई जाके गाने लिखणे चाहिदे ने’ और...। दो साल बीतते-बीतते मैंने ठान लिया कि मुंबई जाकर ही इसी फील्ड में अपना करियर बनाउंगा। कई साल की मेहनत के बाद मैंने ग्लोबल हिट गाना बेबी डॉल... लिख डाला। इसी गाने से खास पहचान बनाने वाले चर्चित गीतकार कुमार उर्फ राकेश ने यह खुलासा किया। वह यहां दीपक बिल्डर्स के मालिक दीपक सिंहल की बेटी हीना के लिए लिखे गाने ‘क्रेजी बालम’ की एलबम रिलीज करने आए थे।

कुमार ने बड़ी बेबाकी से दिलचस्प खुलासा किया कि जब ‘बेबी डॉल मैं सोने दी, ए दुनिया पित्तल दी’ गाना लिखा, तब उसकी अहमियत नहीं जान सका था। उसके ग्लोबली हिट होने के छह महीने बाद मुझे समझ आया कि मैंने बहुत ही अच्छी बात लिखी है। हालांकि पीतल और सोना दोनों का रंग एक ही होता है, लेकिन क्वालिटी और अहमियत बिल्कुल अलग। फिर बताने लगे कि लंबे स्ट्रगल के बाद मुझे दोस्ताना फिल्म के देसी गर्ल और मां दा लाडला बिगड़ गया जैसे गीत लिखने के बाद पहचान मिली थी।
पंजाबी फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। सन 1996 से चार साल स्ट्रगल करने के बाद 2000 में पंजाबी सिंगर सुखबीर के लिए ‘इश्क तेरा तड़पावे’ पहला गीत लिखा। उसके बाद फिल्मों के ऑफर भी आने लगे और सफलता की सीढ़िया चढ़ने लगा। जालंधर के रहने वाले कुमार को अपने शहर की तो बहुत आती है, मगर मायानगरी यानि मुंबई ने दूसरे मशहूर कलाकारों की तरह उनको भी ग्लैमर के ताने-बाने में उलझा रखा है। लिहाजा चाहकर भी मनचाहे तरीके से अपने शहर नहीं आ आ पाते हैं। यादों के पन्ने पलटते कुमार बताने लगे कि जब सन 1996 में पढ़ाई खत्म होते ही मैंने पापा (धर्मपाल जी) के सामने करियर की खातिर मुंबई जाने की हसरत रखी। उन्होंने बिना किंतु-परंतु मेरी खुशी के लिए हामी भर दी। दस साल बाद जब गीतकार के तौर पर शोहरत मिली तो वो प्रोफेसर भी मुझे भूल चुके थे, जिन्होंने मुझे पहली बार मुंबई जाकर गीत लिखने की सलाह दी थी।