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निगम अफसर नहीं बनेंगे मामू, अब लेंगे ‘गुड फॉर पेमेंट’ चेक से रिकवरी

7 वर्ष पहले
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लुधियाना. सीएलयू, बिल्डिंग कंपोजीशन और बकाया हाउसटेक्स की रिकवरी के दौरान नगर निगम अफसरों को मामू बनाने वाले डिफॉल्टर्स का फंडा नहीं चल पाएगा। निगम अब एक लाख रुपए से अधिक की कोई भी रिकवरी केवल ‘गुड फॉर पेमेंट’ चेक के जरिए ही लेगा।

ये फरमान नगर निगम कमिश्नर प्रदीप कुमार अग्रवाल ने रिकवरी को लेकर आयोजित रिव्यू मीटिंग में जारी किया। नगर निगम के चारों जोन में लोगों की ओर से दिए जाने वाले दर्जनों चेक अकाउंट में बैलेंस न होने के चलते बाउंस हो रहे थे और ये मुद्दा जोनल कमिश्नरों की ओर से मीटिंग में निगम कमिश्नर के समक्ष उठाया गया था।

रिकवरी दौरान निगम अफसरों को बनाया जाता है मामू
पानी-सीवरेज व बिल्डिंग कंपोजीशन व सीएलयू की वसूली दौरान जब नगर निगम के अफसर किसी प्रॉपर्टी मालिक के पास पहुंचते हैं, तो उससे मौके पर ही लाखों रुपए की बकाया रिकवरी देने को कहा जाता है। ये अदायगी न होने पर उसकी बिल्डिंग सील करने तक की धमकी दे दी जाती है। इस दौरान कई डिफॉल्टर निगम को मामू बना ऐसे बैंक अकाउंट का चेक दे देते हैं, जिनमें बैलेंस नहीं रहता।
ये होता है गुड फॉर पेमेंट चेक
गुड फॉर पेमेंट चेक पर संबंधित बैंक मोहर लगाकर देता है। बैंक ऐसे चेक की पेमेंट अकाउंट में सील कर देता है और इस पेमेंट का किसी दूसरे इस्तेमाल के लिए यूज नहीं किया जा सकता है।
- चेक बाउंस के मामले बढ़ने के चलते ये फैसला लिया गया है। इससे ये साफ रहेगा कि निगम को इतनी रिकवरी आने वाली है और लोग निगम को बेवकूफ नहीं बना पाएंगे। - प्रदीप कुमार अग्रवाल, निगम कमिश्नर