(भाइयों के शवों को देखकर बदहवास हुई बहन।)
लुधियाना। शनिवार को जमालपुर की आहलूवालिया कॉलोनी में हुए फर्जी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए एक अहम खुलासा हुआ है। सोची समझी योजना के तहत उन पर फायरिंग इस तरह से की गई ताकि उनकी मौत हो जाए। हरिंदर और जतिंदर को कुल पांच गोलियां लगीं। सारी फायरिंग क्लोज रेंज से की गई। एक गोली हरिंदर दी दाईं कनपटी और बाईं तरफ से बाहर आ गई। एक गोली बाजू पर लगी, तीसरी गोली छाती की दाईं साइड से लगकर लीवर में फंस गई। जतिंदर के सिर के बीच में इस तरह से मारी कि गले में उतर गई।
सिविल हॉस्पिटल में डॉ. सुदेश कौशल, डॉ. जसवीर कौर और डॉ. सीमा चोपड़ा के पैनल ने दोनों की लाश का पोस्टमार्टम किया। डॉ. कौशल के अनुसार, जतिंदर को एक गोली दाएं हाथ की इंडेक्स फिंगर की हड्डी तोड़ कर निकल गई। सिर पर गोली लगने के कारण गिरने से उसके माथे और घुटनों पर चोट लगी। सूत्रों के अनुसार शरीर से मिली गोलियां प्वाइंट 32 एमएम, जोकि पिस्टल की लगती हैं। आरोपियों से हथियार बरामद करने के बाद ही उनकी फोरेंसिक जांच से खुलासा होगा।
थाना जमालपुर पुलिस ने गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों एसएचओ के रीडर हेड कांस्टेबल यादविंदर सिंह, होमगार्ड जवान अजीत सिंह बलदेव सिंह और पूर्व अकाली सरपंच गुरजीत सिंह सैम को अदालत में पेश किया। आरोपियों को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास मनी अरोड़ा की कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने आरोपियों को एक अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान घटनास्थल से पुलिस ने 32 बोर के खोल बरामद किए। आरोपियों से अभी असलहा बरामद किया जाना है।
डीसी रजत अग्रवाल को सौंपी जांच
सीएम परकाश सिंह बादल ने फर्जी एनकाउंटर की जांच डीसी रजत अग्रवाल को सौंपी है। रविवार को सीएम ने कहा कि ये बड़ा संगीन मामला है। जांच के बाद जो भी सच्चाई सामने आएगी, उसके अनुसार सरकार एक्शन लेगी। गांव बौपुर के सतपाल के बेटे जतिंदर सिंह और हरिंदर सिंह को माछीवाड़ा पुलिस ने शनिवार सुबह आहलूवालिया कॉलोनी की कोठी नंबर 177 ए में घेर कर मार डाला। पुलिस के साथ अकाली सरपंच के पति गुरजीत सिंह भी थे। डीआईजी के आदेश पर कत्ल का केस दर्ज कर लिया गया है, लेकिन इसकी असलियत क्या है, इसकी जांच के लिए डीसी रजत अग्रवाल की ड्यूटी लगाई है।
दोनों की एक ही चिता बनवा सतपाल ने दी मुखाग्नि
गांव भौपुर में 28 सितंबर को मरघटी सन्नाटा था, क्योंकि सतपाल सिंह के दोनों जवान बेटों जतिंदर सिंह और हरिंदर सिंह की लाश पोस्टमार्टम के बाद गांव में पहुंचने वाली थीं। ये दोनों सगे भाई शनिवार को लुधियाना की आहलूवालिया कॉलोनी में शूटआउट के दौरान मारे गए थे। माहौल तनावपूर्ण देख गांव में कड़ी पुलिस सुरक्षा थी। दोनों शव सीधे श्मशानघाट लाए गए तो सारा गांव उमड़ पड़ा। बचपन से दोस्तों की तरह रहे दोनों बेटों को आखिरी पल तक जुदा न करने का फैसला कर सतपाल सिंह ने उनके शव एक ही चिता पर रखवा मुखाग्नि दी। यह मंजर देख सबकी आंखें छलक उठीं।
रिश्तेदार बिलखकर रोए तो जवान बेटों की मौत से बेहाल गुरमीत कौर का विलाप देखकर औरतें भी दहाड़ें मारने लगीं। सतपाल की इकलौती बेटी रुपिंदर कौर तो एक साथ दोनों सगे भाइयों के कत्ल के सदमे से जैसे पत्थर हो गई। उसकी हालत देख बुजुर्ग अरदास करने लगे। जबकि जज्बात पर काबू न रख पाए चाचा हकीकत सिंह ने श्मशानघाट में ही चीख-चीखकर भतीजों के कातिलों के खिलाफ भड़ास निकाली। गांव के एक सिरे पर श्मशानघाट होने के बावजूद दोनों भाइयों के संस्कार में तमाम औरतें भी पहुंचीं। जबकि गांव के दूसरे सिरे पर खेतों में बने उनके मकान पर भी लोगों का तांता लगा रहा।
हमले का पोस्टमार्टम
4 दिन पहले भी की फायरिंग तीन दिन से हो रही थी रेकी
हरिंदर और जतिंदर के मर्डर से पहले उनके गुट पर दूसरे पक्ष के लोगों ने 26 सितंबर को फायरिंग की थी। इसमें पुलिस की गिरफ्त में पहुंचे राजवीर और बन्नी बाल-बाल बच गए थे। राजबीर और बन्नी उसी मकान में रह रहे थे, जहां 27 सितंबर को वारदात हुई। वारदात से 15 मिनट पहले भी उन्हें पुलिस रेड का पता चल गया था। लेकिन फिर भी दोनों भाई मौत से बच न सके।
26 सितंबर को हमले के दौरान जब दोनों भाई अपने अन्य साथियों समेत गढ़ीशकंर गांव के पुल से जा रहे थे तो उन पर ताबड़-तोड़ फायरिंग की गई। फायरिंग करने वाले पांच-छह लोग स्कॉर्पियो में सवार थे। इसकी सूचना पुलिस को भी दी गई थी। लेकिन किसी ने भी कार्रवाई नहीं की।
उसी दिन दोनों भाइयों के पिता सतपाल को पुिलस ने थाने में हाजिर होने के लिए कहा था। पिता से दोनों बेटों के पहले से दर्ज केसों को लेकर बातचीत की जानी थी। साथ ही वारदात से तीन दिन पहले दूसरे पक्ष के लोगों ने अपने तौर पर कोठी की रेकी भी करवाई थी। दो लड़के पीजी किराए पर लेने के बहाने कोठी में गए थे और मालकिन से बातचीत कर किराया भी तय कर आए थे। अगले दिन आने का बोलकर चले गए।
26 सितंबर सुबह दोनों लड़के आए और बहाना बनाकर 27 को आने का कहकर चले गए। इस दिन कुछ समय तक वह कोठी में रुके। आशंका है कि उन्होंने कोठी के अंदर का पूरा जायजा लिया होगा। दोनों भाइयों और उनके एक साथी को इस बात की भनक लग गई थी कि पुलिस को इस ठिकाने का पता चल गया है। पुलिस रेड से ठीक 15 मिनट पहले ही उन्हें सूचना मिल गई थी। तभी वह भागने की तैयारी में ही थे। लेकिन इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंच गई।
जल्दबाजी में ही भूल गए कार की चाबी
रेड का पता चलने पर दोनों भाई वहां से भागने लगे तो जल्दबाजी में कार की चाबी भूल गए। इसी दौरान राजवीर कार में बैठ गया। हरिंदर उर्फ लाली चाबी लेने के लिए अंदर गया और अन्य दोस्त भी घर में ही थे। हरप्रीत कौर के अनुसार इसी दौरान उसके घर में चार लोग दाखिल हुए। इनमें से एक के पास छोटी पिस्तौल, दो के पास राइफल और एक खाली हाथ था। लाली सीढ़ियां चढ़ने लगा तो उसकी खाली हाथ वाले व्यक्ति से हाथापाई हो गई। इस दौरान पिस्तौल वाले ने हरिंदर पर गोली चलाई जो कि छाती पर लगी और वह गिर गया। एक लड़का भाग कर बाहर गया तो एक व्यक्ति उसको पकड़ने के लिए बाहर चला गया। राजवीर और उसको पुलिस ने बाहर ही पकड़ लिया। जबकि उनका पांचवां साथी भागने में सफल हो गया।
रीडर को पूर्व सरपंच की ओर से वरना गाड़ी दिलाने की जांच होगी: डीआईजी
पूर्व सरपंच गुरजीत सिंह का मामले से कोई भी लेना-देना नहीं था। ना तो वह हरिंदर और जतिंदर के खिलाफ मामले में शिकायतकर्ता था और ना ही गुरजीत की तरफ से दोनों भाइयों के खिलाफ कोई भी पुलिस शिकायत थी। फिर भी वह पुलिस पार्टी के साथ रेड करने क्यों गया। इसे लेकर पुलिस जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार रीडर यादविंदर सिंह और पूर्व गुरजीत सिंह के आपस में गहरे संबंध थे। अपने राजनैतिक प्रभाव से गुरजीत ने पुलिस पर दबाव बनाया हुआ था। इस कारण दोनों के किसी धंधे को लेकर भी सांझ चल रही थी। गुरजीत ने रीडर को वरना लेने में भी मदद की थी और कुछ मुलाजिमों की फाइनेंशियल हेल्प की थी।
भास्कर ने जब डीआईजी जीएस ढिल्लों से पूछा कि पूर्व सरपंच ने रीडर को आर्थिक मदद की थी तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जाएगा कि आखिर पूर्व सरपंच पुलिस पार्टी के साथ क्यों गया था। अगर वह गया तो उसके पास असलहा क्यों था। दोनों की मिलीभगत को लेकर भी जांच की जा रही है। इस बारे में उन्होंने खन्ना के एसएसपी हर्ष बांसल को भी विशेष निर्देश दिए हैं कि घटना से एक दिन पहले, बाद और घटना में शामिल लोगों के बारे, तत्कालीन एसएचओ की भूमिका के बारे में पूरी तरह से जांच की जाएगी।
इसका भी पता लगाया जाएगा कि इस मामले में आरोपी किस तरह से एक दूसरे के साथ संबंधित थे। मामले में सभी लोगों की भूमिका को खंगाला जाए। जांच के बाद मामले की असलियत को सामने लाया जाएगा कि आखिर दोनों युवकों का मर्डर क्यों किया गया। टीम को गिरफ्तार किए आरोपी की पूरी डिटेल और अगर कोई अन्य आरोपी सामने आते हैं तो उसकी जानकारी जुटाने के लिए कहा है।
फोटो : इकबाल हैप्पी
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