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डाउनलोड करेंलुधियाना। बचपन बचाओ आंदोलन संस्था के को-ऑडिनेटर दिनेश कुमार की शिकायत पर पुलिस ने बाल मजदूरी के चार केस पकड़े हैं। मुक्त करवाए गए इन बच्चों का मंगलवार को सिविल अस्पताल में मेडिकल चेकअप करवा गया गया है। अब पुलिस इन बच्चों से मजदूरी करवा रहे लोगों के खिलाफ मानव तस्करी अधिनियम के तहत अगली कार्रवाई में लगी है। खास बात यह भी रही कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान भारी-भरकम टीम देख हंबड़ा रोड पर एक महिला बेहोश भी हो गई।
सोमवार सुबह-सुबह छुड़वाए गए बच्चों के बारे में बचपन बचाओ आंदोलन के दिनेश कुमार ने बताया कि छुड़वाए गए बच्चों में से 2 हंबड़ा रोड, एक मिल्लर गंज रोड व एक शेरे पंजाब कालोनी के घर से शामिल है। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को मालिक द्वारा सरकार द्वारा निर्धारित किए गए वेतन से बहुत ही कम वेतन देकर कई-कई घंटे मजदूरी करवाई जाती थी, जबकि इनमें से कुछ बच्चों की उम्र 14 वर्ष से कम बताई जा रही है। इनसे बाल मजदूरी करवाना कानूनी अपराध है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की कि आरोपियों पर बंधुआ मजदूरी एक्ट के अधीन मामला दर्ज किया जाए।
चंडीगढ़ से आई थी शिकायत
इस दौरान छापेमारी टीम राहों रोड स्थित गांव सीरा एक कंबल बनाने वाली फैक्ट्री में पहुंची व फैक्टरी का कोना-कोना खंगाल कंबलों को उठाकर भी देखते रहे कि कहीं कोई बच्चा कंबलों के नीचे तो नहीं छुपा दिया गया है लेकिन इस दौरान फैक्टरी मालिक पूरी तरह से घबरा गया कि पता नहीं क्यों इतने बड़े पैमाने पर पुलिस कर्मियों ने उसकी फैक्टरी को घेर लिया है। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें सारी बात बताई लेकिन इस दौरान अधिकारियों के हाथ किसी तरह की कामयाबी नहीं लग पाई। उन्हें मायूस होकर वहां से लौटना पड़ा।
मेडिकल चेकअप के लिए चाइल्ड राइट्स कमीशन को देना पड़ा दखल
छुड़वाए गए बच्चों का छापेमारी टीम के सदस्य सिविल अस्पताल में मेडिकल करवाने पहुंचे तो संस्था के दिनेश कुमार अनुसार डाक्टरों ने मेडिकल करने में आनाकानी की। इस संबंध में उन्होंने चाइल्ड राइट्स कमीशन पंजाब के चेयरमैन सुकेश कालिया को बताया तो उन्होंने इस बात का विरोध करते हुए तुरन्त डाॅक्टरों को बच्चों का मेडिकल करने के आदेश जारी किए, तब कहीं जाकर बच्चों का मैडीकल हो पाया। इसके उपरान्त विभाग ने अगली कार्रवाई शुरू कर दी।
इसी बचपन ने दिलाई शौहरत...
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