(शहर के हर इलाके में इसी तरह आवारा कुत्ते लोगोंे को परेशान कर रहे हैं।)
लुधियाना. चौड़ा बाजार की गुलचमन गली में पिछले 24 घंटों के दौरान 12 लोगों को कुत्तों ने काट लिया। खास बात ये है कि सभी पीड़ित 200 मीटर के दायरे में पड़ने वाली तीन गलियों में रहते हैं। दहशतजदा लोग अपने घरों से डंडे लेकर निकलने को मजबूर हैं। कुत्तों का आतंक ऐसा है कि अकेले सिविल अस्पताल में ही रोजाना डॉग बाइट के 40 केस आ रहे हैं। जहां निगम पिछले दो साल से कुत्तों को पकड़ने और उनके बर्थ कंट्रोल को लेकर कोई योजना तक नहीं बना पाया है, वहीं पीपुल्स फॉर एनीमल ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट कुत्तों की बढ़ती संख्या का सारा ठीकरा निगम के सिर फोड़ रहे हैं।
गुलचमन गली में दोपहर इंदरप्रीत कौर (20) जीएनआईएमटी कॉलेज से घर लौट रही थी। गली में बैठे कुत्तों के झुंड ने इंदरप्रीत को दौड़ाकर कई जगह काट लिया। वहीं 12 साल का शिवम घर से निकल कर बाजार जा रहा था। उसे कुत्तों ने काट लिया। उसके शोर मचाने पर घर में पेंटिंग कर रहा सुधीर बाहर निकल कर आया। कुत्तों ने उसे भी दौड़ा लिया और कई जगह काट लिया। इसी प्रकार गुरतेज सिंह, सुखपाल, पंकज, हरपाल, रिशी, हैप्पी, नवकीरत, हर्ष और गुरदीप भी इनका शिकार हुए। इन लोगों को सिविल हॉस्पिटल में ले जाया गया।
घरों में कैद रहते हैं यहां बच्चे : इलाके में रहने वाले डॉ. गगनप्रीत सिंह कहते हैं कि आवारा कुत्ते यहां रोजाना किसी न किसी काे अपना शिकार बना रहे हैं। बच्चे यहां कमरों में कैद हैं और बड़े लोग जरूरत पड़ने पर किसी न किसी को साथ लेकर जाते हैं। सबसे ज्यादा मुसीबत यहां रहने वाले उम्रदराज लोगों को झेलनी पड़ रही है। पिछले दिनों में भी यहां कुत्तों ने एक कारोबारी का हाथ काटा खाया था। उन्हें 8 टांके लगाने पड़े।
निगम के पास डॉग कैचर और लिफ्टिंग वैन नहीं: निगम के पास न ही कैटल कैचर दस्ता और न ही लिफ्टिंग वैन है। डॉ. वाईपी सिंह के अनुसार, दो साल पहले निगम के 4 मुलाजिमों को इसकी ट्रेनिंग दी गई थी। लेकिन जरूरी संसाधन मुहैया नहीं करवाए गए। नगर निगम के वेटरनरी डॉक्टर वाईपी सिंह ने बताया की कुत्तों की नसबंदी करने का टेंडर तो हो चुका है, लेकिन हॉस्पिटल की बिल्डिंग अभी नहीं बनी। इससे डॉग बाइट्स के केसों में कमी आएगी।
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