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  • पुलिस से बचे रहने और मुर्गे फंसाने के लिए जुआरियों ने किए नए पैंतरे इस्तेमाल करने शुर

जरा सी सादगी आपको जुआरी बना देने के लिए काफी है

6 वर्ष पहले
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लुधियाना। अगर आप कहीं सड़क पर चल रहे हैं तो जरा सावधान! जरा सी सादगी आपको जुआरी बना देने के लिए काफी है। आजकल शहर में इस तरह की घटनाएं आम हो चली हैं। मुल्लांपुर दाखा के एक व्यक्ति के साथ भी ऐसा ही हुआ। मंगलवार को मुल्लांपुर दाखा के रणधीर सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि सुबह वह किसी निजी काम से लुधियाना आया था।

फिरोजपुर रोड पर चुंगी के पास सड़क पर चलते-चलते रास्ते में दो युवकों ने उसे रोका। उसे लगा कि कहीं इधर-उधर का कोई पता वगैरह पूछ रहे हों, लेकिन हैरानी हुई कि उन युवकों ने रणधीर को अपने जाल में फांसने के लिए रोका था। सड़क के किनारे स्कूटर खड़ा करके उसकी सीट पर रखकर एक युवक बार-बार एक पट्टे को गोल-गोल घुमा रहा था और दूसरे युवक को उसके घेरे में अंगुली रखने को कह रहा था। उनमें से एक ने बताया, इन दोनों में शर्त लगी थी कि अगर दूसरे युवक ने बीच वाले घेरे में अंगुली टिकाई तो उसे लगाए गए उसके उसके 100 रुपए के एवज में पूरे 500 मिलेंगे, लेकिन वह ऐसा कर नहीं पा रहा। अब इसके 100 रुपए गए। रणधीर इन दोनों की चाल समझ वहां से निकल लिया। दोनों युवकों ने उसे रोकने की कोशिश की, पर वही नहीं रुका। इसी बीच सड़क पर खड़े एक ट्रक में बैठा उसका ड्राइवर भी रणधीर को उन दोनों युवकों के जाल में फंसता न देख उसकी तरफ मुस्कराया और बोला, क्या बात है बच गए। अब रणधीर की आशंका कि वह दोनों युवक जुआ खेल रहे थे या जुआ खेलाने के लिए राह चलते लोगों को फांसने के लिए वहां खड़े थे, पूरी बलवती हो गई।

रणधीर ने बताया कि कोई 50-60 मीटर शहर की तरफ चलने के बाद चौक पर खड़े एक पुलिस वाले को उसने सारी बात बताई। पुलिस कर्मचारी उसे वहीं खड़े होने की कहकर उन दोनों स्कूटर वाले युवकों की तरफ बढ़ा, लेकिन अगले ही पल दोनों युवक वहां से खिसते बने।

चार फरवरी को पकड़े गए थे पांच लोग, तीन महीने में लगभग 100

गौरतलब है कि चार फरवरी को शहर के विभिन्न थानों की पुलिस ने सरेआम दड़ा सट्टा लगाने के आरोप में पांच लोगों को 10850 रुपए की नकदी के साथ गिरफ्तार किया था। इससे पहले जनवरी के अंतिम सप्ताह में भी चीमा चौक के नजदीक पार्क में नौ लोगों को लुधियाना पुलिस ने जुआ अधिनियम के तहत लगभग 29हजार रुपए के साथ गिरफ्तार किया था। वैसे पिछले तीन महीने का आंकड़ा निकला जाए तो 100 के करीब लोग इस तरह सरेआम गली-कूचे या पार्क में जुआ खेलते पकड़े जा चुके हैं।

2012 में टूटा था रिकॉर्ड

8 अक्टूबर 2012 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक 2012 में दर्ज जुआ खेलने के मामलों ने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। सार्वजनिक पार्कों और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों की पार्किंग क्षेत्रों से गिरफ्तार किया गया है । 2012 में (ऊपर 30 सितंबर तक) जुआ के 235 के आसपास मामले दर्ज किए गए थे और 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दो लाख इन अभियुक्त से रुपए से अधिक बरामद किया था। बीते वर्षों पर गौर करें तो 2011 में जहां 240 केस जुआ खेलने वालों पर दर्ज हुए थे, वहीं 2010 में 147 लोगों को नामजद किया गया था। गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों में अधिकांश 20 से 35 वर्ष के आयु वर्ग के होते हैं।

जुआरी क्यों बदल रहे हैं अपनी चाल
शायद ही कोई दिन होगा, जब पुलिस का क्राइम चार्ट किसी न किसी चौक-चौराहे पर या पार्क में सरेआम दड़ा-सट्टा लगाते 7-8 लोगों के पकड़े जाने की खबर नहीं दिखा रहा होता। इन्होंने भी पुलिस से बचे रहने और मुर्गे फंसाने के लिए नए पैंतरे इस्तेमाल करने शुरू कर दिए हैं।

पुलिस का रवैया सख्त

शहर के ताजा हालात के बारे में बात की गई तो पुलिस के एक उच्च अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रहती है। जहां कहीं भी सूचना मिलती है, तुरंत कार्रवाई की जाती है। हालांकि उन्होंने माना कि ताश खेलकर टाइम पास कर रहे कुछ बेकसूर लोग भी इस तरह के कुछ मामलों में फंस जाते हैं, जिन्हें बाद में जांच के बाद आरोपों से मुक्त कर दिया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इलाके का माहौल ख्कराब न हो इस बात का उनका विभाग पूरा ध्यान रखता है।