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  • It Is Not Fear That The Children Were To Look At The Ceiling, And The Right Gallery

खौफ ऐसा कि ना तो बच्चे छत पर जाते हैं और ना गैलरी से झांकते हैं

8 वर्ष पहले
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लुधियाना. शहर में बिजली की तारों से मरने वाले लोगों की संख्या में भले ही इजाफा होता रहे, लेकिन शहरवासियों को बिजली की नंगी तारों से राहत मिलती नहीं दिख रही। हरेक मोहल्ले में ऐसे ठिकाने हैं जहां बिजली की ये तारें कभी भी लोगों की जान ले सकती है। अब शहरवासियों के भी जेहन यह सवाल घर करने लगा है कि; क्रसबसे महंगी है बिजली तो फिर जान क्यों सस्ती है।

न्यू मॉडल टाउन : कोचर मार्केट के पास का यह इलाका शहर के पॉश इलाकों में शुमार होता है। मकान नं.50 के निचले फ्लोर पर लिट्लि चैंप स्कूल चलता है और ऊपर के फ्लोर पर आरती कालरा का परिवार रहता है। यहां बिजली की तारें मकान की छत से तकरीबन छू कर गुजरती हैं। प्ले-वे स्कूल है और बच्चे छोटे ऐसे में हमेशा चौकन्ना होकर बच्चों की देखभाल करनी पड़ी है। पड़ोस की नीलम टंडन इन तारों से खौफजदा होकर रहती हैं। तारों कुछ दूरी तक प्लास्टिक कवर तो करवा लिया है, लेकिन गर्मी के दिनों में जब हाईटेंशन तारें टूटकर गिरती हैं तो हमेशा जान का जोखिम बना रहता है।
बिजली की तारों से मौत की खबर सुनकर ही लगता है डर : बिजली की तारों से कभी पतंग उड़ाते बच्चे तो कभी सड़क चलते

राहगीर की मौत की खबर सुनते

आरती कालरा खौफजदा हो जातीं हैं। कुछ साल पहले ही साथ पढऩे भाई की जान भी इन नंगे बिजली के तारों से गई थी और अब तक पावरकॉम को शिकायतों के बाद भी हाईटेंशन का खतरा बरकरार है। ऐसे में वे अपनी छत के दरवाजों का कुंडा तक लगाए रखती हैं, ताकि धोखे से भी कोई बच्चा छत पर ना चला जाए।

मॉडल ग्राम : मॉडल ग्राम रेलवे स्टेशन के पास ही बने यहां करीब दो दर्जन मकानों के बिल्कुल ही करीब से हाईटेंशन तार गुजरती है। पिछलो दिनों तारों की चपेट में आकर हादसा भी हुआ गनीमत रही कि युवक की जान नहीं गई, हां इन तारो से सबसे ज्यादा खौफजदा अभय भाटिया और मनीषा का परिवार ने छत के इस ओर झांकना तक बंद कर दिया। पास ही रजनीवाला और अंशु ने बताया कि ठंड में कुछ राहत है मुश्किल तब आती है, जब गर्मी के दिनों में ट्रांसफार्मरफुंकता है और हाईटेंशन तारें घर पर आ गिरतीं हैं।

रोज गार्डन : शहर के शोर में ही तकरीबन शहर के बीचोंबीच का यह ठिकाना बुजुर्गों को सुकून और युवाओं को अपने दोस्तों के साथ समय बिताने का मौका देता है। लेकिन, दुश्वारियां यहां भी कम नहीं होतीं; एंट्री प्वांट से लेकर करीब हर स्ट्रीट लाइट के पास जमीन से सटा बिजली के नंगे तारों से आने-जाने वाले हरेक व्यक्ति के करंट की चपेट में आने का डर बना रहता है। दिन में तो ज्यादातर लाइटें बुझी होती हैं, लेकिन शाम ढलते ही यहां स्ट्रीट लाइटों की दुधिया रोशनी के साथ करंट लगने का खतरा भी बढने लगता है। रोज
गार्डन की सैर यानि रोज-रोज जान जोखिम है।