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जज की गाड़ी के चालान का केस: 2 साल का रूल इग्नोर, 3 महीने बाद ही दहिया ट्रांसफर

7 वर्ष पहले
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लुधियाना. हाईकोर्ट के जज की गाड़ी का चालान काटने वाले एसीपी ध्रुव दहिया के ट्रांसफर में पंजाब सरकार ने केंद्र द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आईएएस/आईपीएस/आईएफएस कैडर नियमों में किए संशोधन को इग्नोर कर यह फैसला किया। इसी वर्ष 30 जनवरी को लिए फैसले में तय किया गया था कि आईएएस, आईपीएस व आईएफएस अफसरों का ट्रांसफर दो साल से पहले नहीं किया जा सकता, जबकि आईपीएस ध्रुव दहिया का ट्रांसफर 3 महीने में ही कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2013 को यह आदेश दिए थे। इसके बाद ब्यूरोक्रेसी में पॉलीटिकल एंटरफेयरेंस रोकने के लिए यह संशोधन किया गया था।
सिविल सेवा बोर्ड ही कर सकता है ट्रांसफर
संशोधन के मुताबिक हर स्टेट में चीफ सेक्रेटरी की अगुवाई में सिविल सेवा बोर्ड बनेगा। बोर्ड की रिकमंडेशन से ही कैडर अफसरों की नियुक्ति होगी और 2 साल से पहले ट्रांसफर भी सिर्फ बोर्ड की रिकमंडेशन पर हो सकेगा। अफसर किसी भी कैडर पोस्ट पर किसी ऑफिस में कम से कम दो साल तक रहेगा। बोर्ड समय पूर्व ट्रांसफर पर विभाग से कारण पूछ सकता है। जिस अफसर का तबादला किया जाता है उसके कमेंट्स ले सकता है। समय से पहले ट्रांसफर के कारण से बोर्ड संतुष्ट नहीं तो वो तबादला नहीं हो सकता। वहीं, ऐसे ट्रांसफर केसेज में बोर्ड को हर तीसरे महीने अफसरों की डिटेल व कारण की रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी होगी।
सोशल मीडिया में भड़का गुस्सा
हाईकोर्ट के जज का चालान काटने के चार दिन बाद एसीपी ध्रुव दहिया के ट्रांसफर पर फेसबुक व व्हाट्सएप में लोगों का गुस्सा भड़क रहा है। पब्लिक ने इसका कड़ा विरोध किया कि उचित कार्रवाई के बाद भी एसीपी का ट्रांसफर क्यों किया गया? लोगों ने पंजाब सरकार कोसते हुए हाईकोर्ट से भी मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। वहीं इसके विरोध में लोगों को एकजुट करने के लिए change.org पर ऑनलाइन सिग्नेचर कैंपेन चलाया जा रहा है।
ये रुटीन प्रोसेस है। इसे जज का चालान काटने की घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कानून सब के लिए बराबर है।- सुखबीर बादल, डिप्टी सीएम