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डाउनलोड करेंलुधियाना। लोगों को पता है कि सरकारी नौकरी में अपनी मर्जी से जितनी चाहे छुट्टी करो कोई कुछ कहने वाला नहीं है। पंजाब में सरकारी नौकरी करने वालों को मौज ही मौज है। राज्य सरकार दो वर्ष से सरकारी स्कूलों से गैरहाजिर रहने वालों अध्यापकों के खिलाफ मुहिम चला रही है। इसका कोई इतना असर नहीं दिखाई दे रहा, क्योंकि शिक्षा विभाग की कार्रवाई कछुआ चाल जैसी है। कई ऐसे टीचर भी हैं जो कई सालोें तक अपनी ड्यूटी पर नहीं आए। भास्कर डॉटकाम के सामने सोमवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। इसमें एक जनवरी 1997 से स्कूल में ड्यूटी से गैरहाजिर रहने वाली सरकारी हाई स्कूल रामगढ़ भुल्लर की मैथ मिस्ट्रैस प्रेमपाल कौर की सेवाएं फोरफीट करने के मामले में विभाग ने 18 साल लगा दिए, जबकि गैर-हाजिरी के 17 वर्ष बाद पिछले साल अगस्त में वह रिटायर हो चुकी हैं। शिक्षा विभाग के डीपीआई ने 5 फरवरी को उक्त अध्यापिका की सेवाएं फोरफीट करने के आदेश जारी किए हैं। मैथ मिस्ट्रैस के जारी किए गए सेवाएं फोरफीट होने के आदेशों में लिखा गया है कि जांच अधिकारी की ओर से वर्ष 2011 में उक्त अध्यापिका की जांच रिपोर्ट भी सौंपने के बाद विभाग ने सितंबर 2011 में 15 दिनों के भीतर गैर हाजिर चल रही मिस्ट्रैस से जवाब मांग था, जिसका कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि विभाग की ओर से पिछले वर्ष दिसंबर में भी लुधियाना के 2 विभिन्न सरकारी स्कूलों में तैनात अध्यापकों को डिसमिस किया गया था। इससे पहले वर्ष 2013 मे भी पूर्व डीजीएसई काहन सिंह पन्नू ने लुधियाना के ही 45 ऐसे अध्यापकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए थे, जो पिछले लंबे समय से ड्यूटी से गैर हाजिर थे।
केस की स्टडी करना जरूरी
इस बारे में डीपीआई बलबीर सिंह ने कहा कि हर कर्मचारी पर कार्रवाई से पहले केस की नेचर स्टडी करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस मैथ मिस्ट्रैस पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी पिछले समय से जारी थी, जिसके बाद उसकी सेवाएं फोरफीट करने के आदेश जारी किए हैं।
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