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  • मार्च में बोर्ड के एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स पर बढ़ने लगी टेंशन और स्ट्रेस

मेडिटेशन कर स्ट्रेस भगाएं और अच्छे नंबर पाएं

6 वर्ष पहले
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लुधियाना। लगातार बढ़ रहे कंपीटिशन व मार्क्स अच्छे लाने की होड़ में मार्च में बोर्ड के एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स पर टेंशन और स्ट्रेस बढ़ने लगा है। इसी से छुटकारा पाने के लिए बच्चे योग सेंटर और मोटिवेशनल स्पीकर्स व रिट्रीट सेंटर्स पर अपना ध्यान फोक्स कर रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के अजय और नीरज ग्रोवर ने बताया कि हमारे पास आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में बढ़ावा हुआ है। अब तो हम भी हैरान हैं क्योंकि एक हफ्ते में करीब 100 स्टूडेंट्स आ रहे हैं। भास्कर डाटकॉम से बात करते हुए उन्होंने बताया कि स्टूडेंट्स को योग और मेडिटेशन का सहारा लेना चाहिए, क्योंकि इससे स्ट्रेस लेस हो जाता है।

इन बातों का रखें खास ध्यान

एग्जाम की तैयारी एक दिन में नहीं हो सकती। जरूरी है कि अभी से उन्हें एग्जाम की तैयारी करवानी शुरू कर दीजिए। एग्जाम के लिए सही स्टडी प्लान बनाने में बच्चों की मदद करें। इसके अलावा, अगर उन्हें स्टडी के लिए किसी विशेष चीज की जरूरत है तो उनकी वह जरूरत भी पूरी करें। इसके अलावा अगर आपका बच्चा किसी विषय में आपसे हेल्प मांगता है और आपको विषय की नॉलेज है तो जरूर उसकी हेल्प करें। आपकी तरफ से मिलने वाला पॉजिटिव रिस्पॉन्स बच्चे को हिम्मत और डिटर्मिनेशन देगा।
सही इन्वाइरनमेंट
एग्जाम प्रिपरेशन चाहे यूनिवर्सिटी लेवल की हो या किसी छोटी क्लास के लिए, दोनों के लिए ही स्टडी का सही इन्वाइरनमेंट बहुत जरूरी होता है। बच्चों को सही इन्वायरनमेंट देने के लिए घर में शांति का माहौल बनाएं। हो सके तो टीवी बिल्कुल न चलाएं। बच्चे को स्टडी के लिए एक अगल कमरा दें, जहां उसके लिए सभी सुविधाएं मौजूद हों।
डिफिकल्ट सब्जेक्ट में हेल्प
अगर बच्चा किसी विषय में कमजोर है, तो उस विषय की पढ़ाई में बच्चे को हेल्प की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए हो सके तो उस विषय की खुद भी कुछ तैयारी रखें। इसके अलावा इस विषय को लेकर उसके स्कूल टीचर या ट्यूशन टीचर से मिला जा सकता है। खुद भी बच्चे के साथ बैठकर इस सब्जेक्ट को फन स्टडी में तब्दील किया जा सकता है।
प्रेशर न डालें
यूं तो एग्जाम का प्रेशर आप पर भी है और बच्चे पर भी लेकिन अपनी तरफ से कूल रहें और बच्चे पर भी किसी तरह का प्रेशर डालने से बचें। इस दौरान न तो उसके सामने किसी और की एग्जाम तैयारी की बात करें और न ही उसे किसी और से कम्पेयर करें। इसके अलावा, बच्चे पर अपनी उम्मीदों और आशाओं का बोझ डालने से भी बचें।
खान- पान का रखें ख्याल
जान है तो जहान है, फिट है तो हिट है जैसे जुमले बताते हैं कि सेहत हमारे लिए कितनी जरूरी है। बच्चा पढ़ने में व्यस्त है इसका मतलब ये नहीं कि आप भी उसका खाना भूल जाएं। एग्जाम प्रिपरेशन के दौरान बच्चे के खान-पान पर अतिरिक्त ध्यान देने की भी जरूरत है। दरअसल इस दौरान बच्चे को दिमागी तौर पर बहुत मेहनत करनी पड़ती है इसलिए उसे ज्यादा पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
नींद हो पूरी
जिस तरह अस्वस्थ शरीर पूरी तरह पढ़ाई पर फोकस नहीं कर सकता, उसी तरह थका हुआ शरीर भी ठीक से नहीं पढ़ सकता। बच्चे के सोने और जगने का टाइम डिसाइड करें। अगर वह देर से भी सोता है, तो उसकी नींद पूरी हो, इस बात को जरूर सुनिश्चित करें, ताकि फिर वह फ्रेश माइंड के साथ पढ़ने बैठे। अच्छी परफॉर्मेंस के लिए जरूरी है कि बच्चा स्ट्रेस फ्री रहे इसलिए एग्जाम प्रिपरेशन के दौरान ऐसा न हो कि आप सारा दिन उसे बस पढ़ाने ही बिठाएं। बच्चे को दिन में फ्रेश होने और स्ट्रेस फ्री होने का मौका दें। इसके लिए टीवी देखना, खेलना, गेम्स खेलना जैसे तरीके बच्चे खुद डिसाइड कर सकते हैं।