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डाउनलोड करेंलुधियाना। समाजसेवी संस्थाएं बाल मजदूरी करवाने वालों से पंगा लेती हैं, पुलिस कार्रवाई भी करती है। बाल मजदूरों को मुक्त करवाया जाता है। स्कूल भी भेजा जाता है, लेकिन बावजूद इसके अगर थोड़ी सी दूरदृष्टि रखें तो में बाल मजदूरों की तादाद फिर से वैसी हो जाने वाली है। कारण सरकारी नीतियां, जनकी वजह से अब जल्द ही झोंपड़-पट्टी इलाके में चल रहे 40 एनसीएलपी स्कूल बंद हो सकते हैं। अगर ऐसा हो गया तो फिर लाजमी है कि शहर में करीब 2000 बाल मजदूर फिर से मजदूरी के लिए मजबूर होते देखे जा सकते हैं।
कल ही मुक्त करवाए थे चार बच्चे
गौरतलब है कि बचपन बचाओ आंदोलन संस्था के को-ऑडिनेटर दिनेश कुमार की शिकायत पर साेमवार को पुलिस ने बाल मजदूरी के चार केस पकड़े थे। 2 हंबड़ा रोड, एक मिल्लर गंज रोड व एक शेरे पंजाब कालोनी के घर से छुड़वाए गए इन बच्चों का मंगलवार को मेडिकल चेकअप करवाने पुलिस सिविल अस्पताल पहुंची तो डाक्टरों ने मेडिकल करने में आनाकानी की। इस संबंध में उन्होंने चाइल्ड राइट्स कमीशन पंजाब के चेयरमैन सुकेश कालिया को बताया तो उन्होंने तुरन्त डाॅक्टरों को बच्चों का मेडिकल करने के आदेश जारी किए, तब कहीं जाकर बच्चों का मेडिकल हो पाया। अब पुलिस अगली कार्रवाई में जुटी है, लेकिन भास्कर डॉट कॉम ने मामले की तह तक जाने की कोशिश की तो पता चला कि आए दिन एक-एक, दो-दो करके छुड़वाए जाने वाले इन बच्चों के फिर से वही पुराने दिन लौटने वाले हैं।
यहां खास बात यह है कि केंद्रीय योजना के तहत अतिरिक्त आयुक्त (विकास) की देखरेख में शहर की झोंपड़-पट्टी इलाके में चल रहे 40 एनसीएलपी स्कूलों के अध्यापकों, क्लर्क, वोकेशनल अध्यापकों व सेवादारों को 18 महीने से वेतन ही नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं स्कूल के किराए का भुगतान भी नहीं किया गया है और न ही इन बच्चों को मिलने वाली प्रति माह 150 रुपये की राशि ही दी गई है। समाजसेवी संस्थाएं किसी तरह इन्हें चालू रखे हुए हैं, लेकिन अब उनकी भी बस हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही इन स्कूलों पर तालाबंदी हो जाएगी।
किस स्टाफ मेंबर को क्या मिलता है, जो नहीं मिल रहा?
अध्यापक 4000 रुपए प्रति माह
वोकेशनल अध्यापक 4000 रुपए प्रति माह
क्लर्क 3000 रुपए प्रति माह
सेवादार 2000 रुपए प्रति माह
किराया 1000 रुपए प्रति माह
वजीफा 150 रुपए प्रति माह
'यह सही है कि 18 माह से एनसीएलपी स्टाफ को वेतन ही नहीं दिया गया। चूंकि यह फंड केंद्र से आता है, इसलिए हम लगातार उनसे संपर्क बनाए हुए हैं। कई पत्र भी लिखे हैं। अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। आशा है है जल्द ही फंड आ जाएंगे।'
-महेश्वरदास, फील्ड ऑफिसर एनसीएलपी।
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