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'राजनीति का अखाड़ा नहीं कोर्ट लडऩे के बजाए सुझाव दें पार्टियां'

7 वर्ष पहले
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चंडीगढ़. पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों पर सुनवाई में सहयोग करने की पंजाब प्रदेश कांग्र्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के प्रधान प्रताप सिंह बाजवा की मांग को बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद बाजवा ने इस संबंध में दाखिल अर्जी वापस ले ली। चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों को यह मामला हाईजेक नहीं करने दिया जाएगा। कोर्ट राजनीति का अखाड़ा नहीं है। ऐसे में राजनीतिक दल लडऩे की बजाए सुझाव दें तो यह सबके हित में होगा।

खंडपीठ ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और पंजाब सरकार से इन मामलों पर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। केंद्र सरकार के असिस्टेंट सोलीस्टर जनरल डॉ. अनमोल रत्न सिद्धू ने अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि एनसीबी के पास मूलभूत सुविधाओं की कमी है। चंडीगढ़ में एनसीबी के अधिकार क्षेत्र में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश हैं जबकि उनके पास महज सात जांच अधिकारी हैं। इस पर खंडपीठ ने केंद्र सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा कि एनसीबी को मजबूत बनाने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। इसकी जानकारी अदालत को दी जाए।

पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल अशोक अग्र्रवाल ने अदालत में कहा कि मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्र्रेस इसे मुद्दा बनाकर लोगों के सामने रखना चाहती है। मंत्रियों के नाम का हवाला देकर राजनीतिक स्वार्थ साधने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट को राजनीतिक मंच बनाकर सीबीआई जांच की मांग की जा रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा है तो राजनीतिक लड़ाई अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखी जाए।

यह है मामला

रिटायर्ड डीजीपी प्रिजन शशिकांत ने इस मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिख कहा कि इंटरनेशनल बार्डर से हर महीने एक हजार किलो हेरोईन की तस्करी देश में हो रही है। इस तरह 5000 करोड़ रुपये का नशीला पदार्थ एक माह में देश में पहुंच रहा है। यह नशा म्यांमार, कंबोडिया, अफगानिस्तान व उत्तर पश्चिम पाकिस्तान से भारत में पहुंच रहा है। इससे पहले सोने की तस्करी की जाती थी लेकिन अब नशे का कारोबार अपने चरम पर है। 13 साल की आयु वर्ग के 60 फीसदी स्कूल बच्चे नशे की चपेट में है। अमृतसर के गांव मकबूलपुरा का उदाहरण देते हुए कहा गया कि स्कूल में 600 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। इन बच्चों में से 70 फीसदी ब"ो नशे के कारण अपने माता पिता को खो चुके हैं। संगरूर का उदाहरण देते हुए कहा गया कि यहां 800 से ज्यादा केमिस्ट दवाइयां बेच रहे हैं लेकिन इनके पास लाइसेंस नहीं है। ऐसे में इन दवा बेचने वालों से आसानी से नशा खरीदा जा सकता है।