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बातों से नहीं दिल भरता; चाहता हूं बच्चों की रोज बस सूरत देख लूं

8 वर्ष पहले
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लुधियाना. बच्चों से रिश्तों का बंधन और उनसे हमेशा दूर रहने का अहसास इतना इन्हें खलता है कि 66 उम्र की सीमा लांघने के बाद कंप्यूटर और इंटरनेट की ट्रेनिंग लेने की सोची। गुरु उपकार सिंह बीआरएस नगर स्थित अपने मकान में पत्नी के साथ रहते हैं। बेटा पहले ही कैनेडा में शिफ्ट हो चुका है; छोटा बेटा होशियारपुर तो बेटी मोगा में रहती है। रिटायर होने के बाद अपने फ्रेंड सर्किल से थोड़े दूर हो गए। बच्चे बाहर रहते हैं तो अकेलापन और बढ़ जाता है, ऐसे में बच्चों से फोन पर ही बातें कर खुद को दिलासा देते हैं।

पड़ोस के कुछ लोगों को जब उन्होंने विदेश में बैठे अपने रिश्तेदारों से इंटरनेट पर वीडियो कॉलिंग के जरिए बातचीत करते देखा तो उनकी भी इच्छा हुई; क्यों न मैं भी ऐसे ही घर बैठे अपने बच्चों से रोजाना रू-ब-रू हो लूं। फिर उन्होंने कंप्यूटर और इंटरनेट चलाने की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। बातों ही बातों जब जज्बात छलका तो बोल पड़े; 'क्या करूं बातों से दिल को तसल्ली नहीं मिलती, एक बार अपने बच्चों का चेहरा देख लूंगा तो दिल को थोड़ा सुकून मिल जाएगा।

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