पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट मिलावटी दूध के खिलाफ सख्त हो रहा है और राज्य सरकारें टालमटोल कर रही हैं। वीरवार को बहस के दौरान भी ऐसा ही माजरा सामने आया। पंजाब सरकार के वकील ने अजीब दलील दी। कहा, 'गायों ने पॉलिथीन खाना शुरू कर दिया है, इसलिए दूध की क्वालिटी गिर रही है।' जवाब में कोर्ट ने कहा, 'तो क्या गाय को यह सब खिलाया जाता है?' वकील ने कहा, 'गायें जब चरने जाती हैं तो घास के साथ-साथ पॉलिथीन और कागज भी खा जाती हैं।
इसका प्रभाव दूध पर दिखने लगा है।' हालांकि पंजाब समेत हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने ये माना भी कि उनके यहां मिलावटी दूध की बिक्री हो रही है। इस पर जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने कहा, 'मुझे तो दूध से डर लगने लगा है। पिछले दो साल से ब्लैक कॉफी ही पी रहा हूं।' बेंच में जस्टिस विक्रमजीत सेन भी शामिल हैं।
कोर्ट ने तीन हफ्ते में राज्यों से मांगे इन सवालों के जवाब
1. मिलावटी दूध के मामले में अब तक किस राज्य में कितने केस दर्ज किए गए?
2. कितने मामलों की सुनवाई अब भी अलग-अलग कोर्ट में लंबित है?
3. कितने लोगों को दोषी ठहराया गया है। उन्हें कितनी सजा हुई है?
4. पिछले दो साल में अधिकारियों ने मिलावटी दूध का कितनी बार निरीक्षण किया है।
उम्रकैद की हो सजा
कोर्ट ने सभी राज्यों से कहा कि मिलावटी दूध बनाने और इसका धंधा करने वालों को उम्रकैद की सजा की व्यवस्था होनी चाहिए। अभी यह मामला खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आता है। जहां अधिकतम सजा छह माह कैद की है। सिर्फ उत्तर प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में उम्रकैद का प्रावधान है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकारों की उदासीनता पर फटकार लगाई। सात राज्यों ने जो हलफनामा दाखिल किया कोर्ट उससे भी संतुष्ट नहीं था।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.