(सांकेतिक फोटो)
लुधियाना. अगर अनएप्रूव्ड एरिया में खरीदे प्लॉट - बिल्डिंग रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत रेगुलर नहीं करवाया तो अब न पावरकॉम से नया बिजली कनेक्शन मिलेगा और न निगम से सीवरेज-पानी कनेक्शन। शहर में 76 हजार रेजीडेंशियल और कॉमर्शियल बिल्डिंग मालिकों के रेगुलराइजेशन न करवाने की वजह से निगम ने पावरकॉम के सहयोग से यह कदम उठाया है।
पहले निगम इन इलाकों में सीवरेज-पानी कनेक्शन और प्रापर्टी नंबर इश्यू कर रहा था। वहीं, पावरकॉम भी कॉमर्शियल-इंडस्ट्रीयल को छोड़कर रेजीडेंशियल को बिना एनओसी के बिजली कनेक्शन इश्यू कर रहा था। लेकिन अब पावरकॉम बिजली कनेक्शन के लिए अप्लाई करने वाले से निगम की एनओसी मांगेगा, जो रेगुलराइजेशन के बगैर नहीं मिलेगी। वहीं, सीवरेज-पानी कनेक्शन के लिए भी पहले प्रॉपर्टी का रेगुलराइजेशन स्टेटस चेक किया जाएगा। साथ में प्रॉपर्टी नंबर पर भी रोक लगा दी गई है, इससे टीएस-1 नहीं मिलेगा तो प्रॉपर्टी की आगे रजिस्ट्री भी नहीं हो सकेगी। चूंकि रेगुलराइजेशन पॉलिसी अगले साल 16 जनवरी को खत्म हो जाएगी, इसलिए निगम सख्ती बरत रहा है।
निगम के इस हार्ड स्टेप से आउटर इलाकों में ज्यादा प्रॉब्लम होगी, जहां नए कंस्ट्रक्शन हो रही है। खास बात यह है कि नए कनेक्शन न देने अौर पुराने काटने की यह कार्रवाई रेगुलराइजेशन पॉलिसी के खत्म होने के बाद की जानी थी, लेकिन निगम की फाइनेंशियल कंडीशन सुधारने के लिए कमिश्नर ने पॉलिसी में क्लियर डायरेक्शन न होने की वजह से इसे अभी से लागू करवा दिया।
पहले नहीं थी रोक
नगर निगम अनएप्रूव्ड एरिया में सीवरेज-पानी के कनेक्शन दे रहा था। वहीं, प्रापर्टी नंबर इश्यू करने पर भी कोई रोक नहीं थी। जब कोई अनअप्रूव्ड एरिया की प्रापर्टी को बेचकर उसकी रजिस्ट्री करवाने जाता था तो ही तहसील में अनएप्रूव्ड कॉलोनियों की लिस्ट देखकर उससे एनओसी की मांग की जाती थी। वहीं, पावरकॉम सिर्फ कॉमर्शियल-इंडस्ट्रियल कनेक्शन के लिए निगम की एनओसी मांगता था। रेजीडेंशियल के लिए नहीं।
अब बढ़ाई सख्ती
अब कॉमर्शियल-इंडस्ट्रियल के साथ नए रेजिडेंशियल बिजली कनेक्शन के लिए भी पावरकॉम एप्लीकेंट से निगम की एनओसी मांगेगा। अनअप्रूव्ड एरिया में प्रापर्टी है तो रेगुलराइजेशन के बाद एनओसी मिलेगी। वहीं, नए प्रापर्टी नंबर, सीवरेज-पानी कनेक्शन देने से पहले भी रेगुलराइजेशन स्टेट्स चेक होगा। हालांकि अनएप्रूव्ड एरिया में अगर पहले से यह सुविधा ले चुके हैं तो 16 जनवरी 2015 को पॉलिसी खत्म होने के बाद इनको काटने की कार्रवाई होगी।
24 हजार प्लॉट, नौ कॉलोनी रेगुलर
सरकार ने 21 अगस्त 2013 काे अनएप्रूव्ड कॉलोनियों और प्लॉट्स को रेगुलर करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी बनाई थी। इसकी अंतिम तारीख अब 16 जनवरी है। लुधियाना में निगम ने लगभग 1 लाख अनएप्रूव्ड प्लॉट्स और 328 अनएप्रूव्ड कॉलोनियां की पहचान की थी। पॉलिसी की कई बार डेट बढ़ चुकी, लेकिन अभी तक सिर्फ 27 हजार प्लॉट और नौ कॉलोनियां ही अप्रूव्ड हो सकी हैं। हालांकि 99 कॉलोनियों के आवेदनों पर रेगुलराइजेशन प्रोसेस चल रहा है। बाकी 220 कॉलोनियों ने आवेदन ही नहीं किया।
बाकी सेवाएं भी नहीं मिलेंगी
नगर निगम की ओर से अनएप्रूव्ड इलाकों की प्रॉपर्टीज में बिना रेगुलराइजेशन प्रॉपर्टी नंबर देना भी बंद कर दिया गया है। प्रॉपर्टी नंबर नहीं मिलेगा तो नगर निगम के सरकारी रिकॉर्ड में प्रॉपर्टी भी नहीं चढ़ाई जाएगी। इससे टीएस-1 भी नहीं मिलेगा। अगर किसी ने ऐसी प्रॉपर्टी को आगे बेचना है तो बिना टैक्स समरी (टीएस)-1 सर्टिफिकेट के इसकी आगे रजिस्ट्री भी नहीं हो सकती। जब प्रॉपर्टी नगर निगम के रिकॉर्ड में नहीं चढ़ेगी तो नगर निगम से किसी भी तरह की सर्विसेज भी नहीं मिलेंगी।
नहीं होगी कोई डेवलपमेंट
निगम ने इसमें नया पेंच भी फंसा दिया है। निगम किसी इलाके को डिक्लेयर एरिया घोषित कर तभी डेवलपमेंट करता है, जब वहां कम से कम 50 परसेंट लोगों के नक्शे पास हों। आउटर इलाके में नक्शे पास नहीं तो फिर यहां सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट जैसी कोई डेवलपमेंट नहीं होगी।
^रेगुलराइजेशन पॉलिसी में ही यह प्रोविजन है। जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। पावरकॉम को लेटर लिखने के बाद लोग निगम के पास रेगुलराइजेशन करवा एनओसी लेने आ रहे हैं। बाद में प्रॉब्लम ने हो, इसलिए मेरी अपील है कि लोग जल्दी ही अपनी प्रॉपर्टी रेगुलर करवा लें। -राजीव सग्गड़, बिल्डिंग सुपरिंटेंडेंट, नगर निगम
- निगम कमिश्नर के नए आदेशों के बाद हमने लोगों की सहूलियत के लिए 33 फुटा रोड पर एक साथ रेगुलराइजेशन, प्रॉपर्टी नंबर व सीवरेज-पानी कनेक्शन का कैंप लगाया है। यह रिजल्ट बढिय़ा है, अब दूसरी जगहों पर भी ऐसी कोशिश करेंगे। -अब्दुल सत्तार, निगम सुपरिंटेंडेंट, जोन बी