पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंलुधियाना। लोग अपने बच्चों को घर से दूर इस आस से भेजते हैं कि रोज-रोज का आना-जाना उनकी पढ़ाई को खराब न कर दे। ये बेचारे अपना पेट काटकर फीस भरते हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि गांव बीरमी के माता सरस्वती नर्सिग इंस्टीट्यूट में खाने के लिए छात्राओं को भूखे पेट नारे लगाने पर मजबूर होना पड़ा। कुछ ने तो होश भी खो दिए थे। बाद में भरोसा मिला कि फिर से ऐसा नहीं होगा, तब कहीं जाकर पेट से सुलगी रोषज्वाला शांत हो पाई।
शहर के करीब सात किलोमीटर दूर स्थित गांव बीरमी के माता सरस्वती नर्सिग इंस्टीट्यूट में मंगलवार को जीएनएम, एएनएम, बीएससी, पोस्ट बेसिक के करीब दो सौ नर्सिग विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ करीब छह घंटे तक मोर्चा खोले रखा। विद्यार्थियों ने पहले इंस्टीट्यूट के अंदर धरना दिया,उसके बाद मेन सड़क पर दो घंटे बैठे रहे। विद्यार्थियों का आरोप था कि उन्हें रविवार दोपहर से खाना नहीं मिला और इसकी जानकारी कॉलेज प्रबंधन को होने के बावजूद उन्होंने खाना उपलब्ध नहीं करवाया। इस कारण इंस्टीटयूट की कई छात्राओं की तबियत भी खराब हो गई। इंस्टीट्यूट में धरने पर बैठी नर्सिग छात्राओं ने बताया कि रविवार को मेस में गैस सिलेंडर खत्म हो गया, जिस कारण पूरा दिन खाना नहीं बना। सिलेंडर खत्म होने की सूचना जब रविवार दोपहर को इंस्टीट्यूट मैनेजमेंट की अध्यक्ष डॉ.सुनीता ढल्ल व डायरेक्टर हरपाल सिंह को दी गई तो दोनों अधिकारियों ने अभद्र भाषा में बात करते हुए फोन बंद कर दिया। इसके बाद कई छात्राओं ने अपने अभिभावकों को इस पूरे मामले के बारे में सूचित किया तो करीब एक दर्जन से अधिक अभिभावक भी इंस्टीट्यूट पहुंच गए। विद्यार्थियों के मुताबिक उन्होंने मंगलवार सुबह आठ बजे फिर अध्यक्ष डॉ. सुनीता ढल्ल व डायरेक्टर हरपाल सिंह को फोन किया, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। उसके बाद डेढ़ सौ के करीब विद्यार्थी इंस्टीट्यूट में धरना देकर बैठ गए। विद्यार्थियों का आरोप था कि करीब दस बजे डॉ. ढल्ल व हरपाल सिंह इंस्टीट्यूट आए और धरने पर बैठे विद्यार्थियों का सामान हॉस्टल से बाहर फेंक देने व कॉलेज बंद करने की धमकी देने के बाद अपने ऑफिस में चले गए। विद्यार्थियों का ये भी आरोप था कि खेतों के बीच बने इस इंस्टीट्यूट के गर्ल्स हॉस्टल में पंजाब व दूसरे राज्यों से पढ़ने के लिए आई करीब सौ से अधिक छात्राएं रहती हैं, लेकिन इसके बाद भी यहां सुरक्षा के प्रबंध नहीं है। हॉस्टल की सुरक्षा ड्राइवरों के जिम्मे है। उनके बच्चों ने बताया कि आसपास के गांवों से कई युवक हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को देखकर हूटिंग करते है और उन्हें फब्तियां कसते हैं। जिस कारण वह हमेशा कमरों में बंद रहने के लिए मजबूर होती हैं। इस मौके पर मौजूद हिमाचल से आए ज्ञान चंद, भारत भूषण चंदेल व अरुण कुमार ने बताया कि उनकी बेटियां व भतीजियां यहां पढ़ती हैं। वह सुबह नौ बजे से यहां आ गए थे। तब से लेकर अभी तक विद्यार्थी भूख से तिलमिला रहे थे। एक तो मेस में रसोई गैस सिलेंडर खत्म है, ऊपर से यहां दूर-दूर तक कोई भी खाने-पीने की दुकान नहीं है। विद्यार्थियों द्वारा रविवार को ही प्रबंधन को रसोई गैस सिलेंडर खत्म होने की जानकारी देने के बाद भी अभी तक न तो गैस सिलेंडर पहुंचा और न ही खाने का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया।
उधर, नर्सिग स्टूडेंटस द्वारा इंस्टीट्यूट से बाहर जाकर सड़क पर धरना लगाने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा तहसीलदार रछपाल सिंह व एसएचओ बरियाम सिंह को पूरे मामले की जांच करने के लिए भेजा गया। दोनों अधिकारी दोपहर करीब साढ़े बारह बजे कॉलेज पहुंचे और विद्यार्थियों को धरना समाप्त करने के लिए समझाने लगे, लेकिन विद्यार्थी इस बात पर अड़े हुए थे कि जब तक प्रबंधन के अधिकारी लिखित रूप में उनके समक्ष आकर अपनी इस गलती को स्वीकार नहीं करते और दोबारा से ऐसा नहीं होगा इसका आश्वासन नहीं देते,तब तक वह धरना समाप्त नहीं करेंगे। शाम चार बजे तक प्रबंधन व विद्यार्थियों के बीच विवाद जारी रहा। साढ़े चार बजे के करीब इंस्टीट्यूट के एमडी बलजिंदर सिंह, अध्यक्ष .सुनीता ढल्ल व डायरेक्टर हरपाल सिंह ने विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि दोबारा से विद्यार्थियों को खाने की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इंस्टीट्यूट का सारा प्रबंध अब मैनेजमेंट खुद देखेगी। अभी तक इंस्टीट्यूट का पूरा कामकाज वित्त सचिव राजिंदर भाटिया देख रहे थे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दो दिन के भीतर सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए जाएंगे।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.