बुढलाडा. ‘मैनूं माफ करो माता-पिता जी। मैं तुहाडे घर दी कबीलदारी नूं चंगी तरां जाणदी हां। मैं तुहाडे ते बोझ नहीं बनना चाउंदी। इस करके मैं मरण जा रही हां। प्लीज मैनूं माफ कर दिओ।’ सोमवार को यह सुसाइड नोट लिखकर गांव अहमदपुर के डाइट की स्टूडेंट ने फंदा लगाकर जान दे दी। घर की गरीबी करमजीत कौर की पढ़ाई में रुकावट बन रही थी।
गांव टाहलिया की करमजीत सोमवार को भी घर से अहमदपुर डाइट जाने के लिए तैयार हुई। जब उसने बस का किराया मांगा तो मां ने अपने बेटे को आटा दाल स्कीम तहत मिलने वाली
गेहूं को बेचने के लिए गांव की दुकान पर भेज दिया। जब यह बात करमजीत को पता लगी तो वह इसको सहन नहीं कर पाई और जान दे दी।
कनक वेचन ते बहुत दुख होआ, मैं मरन जा रही हां
मैंनू माफ करो पिता जी। मैं तुहाडे घर दी कबीलदारी नू चंगी तरह जानदी हां। मैंनू स्कूल दी फीस देण वेले जदों तुसीं घर दी कनक वेची है। आप तुसी मेहनत करके मैंनू ईटीटी दी पढ़ाई कराई। लेकिन हुन नौकरी नहीं मिलदी। मैं तुहानूं भीखी कॉलेज जीएनएम दा कोर्स करन वास्ते कह रही हां। पर जदों मैंनू पता चला कि किराया मंगिया तां मेरी मम्मी ने मेरे तों चोरी कनक वेची। तां बाद विच्च मैंनू पता लगन ते बहुत दुख होआ। मैथों गरीबी देखी नहीं गई। मैं मरन जा रही हां। मैं तुहाडे ते बोझ नहीं बनदी। प्लीज मैंनू माफ कर दियो मम्मी पापा।
चिंता थी कोर्स के बाद नहीं मिलेगी नौकरी
करमजीत ने ईटीटी का कोर्स करने के लिए 2013 में डाइट बुढलाडा में दाखिला लिया था। उसे चिंता थी कि ईटीटी कर नौकरी मिलेगी भी या नहीं। इस कारण वह जीएनएम का कोर्स करना चाहती थी। पर परिवार वालों ने कहा, उनके पास पैसे नहीं हैं। करमजीत के पिता बंत सिंह दिहाड़ी लगाते हैं। छोटा भाई गांव के ही स्कूल में ही पढ़ता है। परिवार ने पुलिस को बिना बताए संस्कार कर दिया। गांव के पूर्व सरपंच गुरजीत सिंह टाहलिया ने मांग की सरकार गरीबी में जी रहे परिवार को पांच लाख रुपए मदद दे। परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। वहीं डीएसपी बुढलाडा राजवीर सिंह बोपाराय ने बताया कि वह मामले की जांच करवाएंगे।