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  • Sukhdev Thapar Killed With Bhagat Singh And Rajguru Under Threat Of Mutiny

एक नहीं, कई मौत मरे भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु, जानिए क्रूरता का पूरा सच...

8 वर्ष पहले
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तीन मतवाले...फांसी के तख्ते को चूमने जा रहे थे और हर्षित मन से गा रहे थे-
मेरा रंग दे बसन्ती चोला, माए रंग दे
मेरा रंग दे; मेरा रँग दे बसन्ती चोला। माए रंग दे बसन्ती चोला।।
उनकी कुर्बानी की बानगी आज भी आवाम के जहन में ताजा है। पर आपको मालूम है कि आखिर किस क्रूरता के साथ भारत के इन वीर सपूतों को हुकूमत ने अपने अहम की भेंट चढ़ाया था। आज एक विशेष दिन है....एक खास दिन जो शायद बहुतों को याद न हो मगर आज ही के दिन इस देश में पैदा हुई थी एक महान विभूति जिसने शहीद-ए-आजम भगत सिंह और राजगुरू के साथ मिल कर क्रांति की नई इबारत लिख दी थी।
15 मई 1907 की गर्म दुपहरी...लुधियाना के पुराना किला नौघारा में एक बच्चे का जन्म होता है। जन्म के तीन माह पूर्व ही उनके पिता का निधन हो गया था। शोक संतप्त परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। घर में एक हष्ट-पुष्ट बालक का जन्म होता है मगर उसे देखकर उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर यही साधारण सा बालक कुछ ऐसा काम कर जाएगा जिसकी आने वाली नस्लें न केवल कसमें खाएंगी बल्कि नजीर भी देंगी।
मगर हश्र...आखिर उन्हें इस महान कुर्बानी का सिला क्या मिला...एक शहीद का तमगा और एक ऐसी मौत जो भले ही नजीर बन गई उसे जिस क्रूरता से उसे अंजाम दिया गया उसे पढ़ आपके पसीने छूट जाएंगे...एक ऐसी क्रूरता जिसके सामने मौत भी शर्म खा जाए...
सुखदेव थापर ने महज 22 साल की उम्र में देशभक्ति की अमर मिसाल लिख कर भगत सिंह और राजगुरू के साथ मौत को गले लगा लिया था मगर उन्हें एक नहीं कई मौतों के कुचक्र से गुजरना पड़ा था....दैनिक भास्कर डॉट काम अमर शहीद सुखदेव थापर की जन्म तिथि पर आपके लिए लाया है एक ऐसी खबर जिसे पढ़ आपकी आत्मा कांप उठेगी,,,जानिए इन अमर शहीदों की शहादत का पूरा सच इस मेगा स्टोरी के जरिए।
आगे की स्लाइड्स में जानिए अंग्रेजी हुकूमत के इस काले अध्याय का पूरा सच और सुखदेव थापर व भगत सिंह के बारे में छुए-अनछुए पहलुओं को तस्वीरों के झरोखे से....