पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंलुधियाना। शहर में स्वाइन फ्लू तेजी से बढ़ रहा है और प्रशासन मस्त है। अगर किसी मरीज की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई तो इसका जवाब कौन देगा। प्रशासन सिर्फ दावे करता है पर ग्राउंड रिपोर्ट कुछ ओर ही है। भास्कर डॉटकाम ने शनिवार सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पड़ताल की तो अनेक खामियां सामने आईं अब तक आधा दर्जन के करीब मरीज अपनी जान से हाथ धो चुके हैं। इस शहर की आबादी करीब 40 लाख है उसके हिसाब से प्रशासन को प्रबंध करने चाहिए। आने वाले दिनों में अगर खामियां इसी तर रही तो स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। अगर हम सरकारी अस्पताल की बात करे तो यहां स्वाइन फ्लू के कुछ प्रंबध हैं पर गंभीर स्थिति होने पर मरीज को बचाने के लिए जहां कोई इंतजाम नहीं है। सिविल अस्पताल के बर्न यूनिट के सामने स्थित केवल तीन बेड के कमरे को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया गया है। वार्ड में केवल स्वाइन फ्लू से ग्रसित मरीज ही रखे जाएंगे, जिससे अन्य मरीजों को इस बीमारी का खतरा न हो। इसके अतिरिक्त अलग से डॉक्टर, नर्स व वार्ड ब्वॉय भी नियुक्त किया गया है। ये तैयारियां केवल उन मरीजों के लिए पर्याप्त हैं, जो स्वाइन फ्लू की प्रथम व दूसरी स्टेज पर है। प्रथम व द्वितीय स्टेज पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के इलाज के लिए डॉ. गुरमीत सिंह व डॉ.अविनाश जिंदल की डयूटी लगाई गई है। हालांकि, इस वार्ड के अंदर जिस तरह बेड व मेडिकल उपकरण रखे गए थे, उसे देखकर बिल्कुल नहीं लगा कि यह आइसोलेशन वार्ड है। आइसोलेशन वार्ड में मरीजों के बेड को एक निश्चित दूरी पर रखा जाना चाहिए, लेकिन यहां बिलकुल उलट था। मरीजों के बेड बिलकुल साथ-साथ सटे थे और न ही ट्राली का इंतजाम था। स्वाइन फ्लू की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ठोस प्रबंध नहीं है। आइसोलेशन वार्ड के समीप ही आइसीयू वार्ड तो तैयार कर दिया गया है,लेकिन अभी तक सुविधाएं हैं। इसके चलते यह वार्ड बंद पड़ा है। वहीं, अत्यधिक गंभीर स्थिति सांस फूलना, फेफड़ों में पानी भरना,सास रुक जाना व धड़कन बंद होने जैसी समस्याओं को लेकर अस्पताल में पहुंचने वाले मरीज को सपोर्ट देने के लिए यहां केवल एक ही मैनुअल वेंटीलेटर का इंतजाम है, जो कि करीब पंद्रह वर्ष पुराना है। भास्कर डाटकॉम ने जब आइसोलेशन वार्ड का जायजा लिया तो मैनुअल वेंटीलेटर दीवार के साथ बंद अवस्था में रखा मिला। नाम न छापने की शर्त पर नर्स ने बताया कि इस वेंटीलेटर में एक भी आधुनिक तकनीक ऐसी नहीं है, जैसी कि स्वाइन फ्लू के गंभीर रूप से पीड़ित मरीज की देखरेख के लिए होनी चाहिए। विशेषज्ञों की मानें तो स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आधुनिक वेंटीलेटर की जरूरत होती है। लुधियाना मेडीवेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के हेड व मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ.गौरव सचदेवा के मुताबिक स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आइसोलेशन कमरे में नई तकनीक के वेंटीलेटर अलग से होने चाहिए। स्वाइन फ्लू के मरीजों के इलाज में प्रयुक्त होने वाले वेंटीलेटर को दूसरे मरीज के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है। क्योंकि इससे इंफेक्शन हो सकती है। ऐसे में अगर यहां गंभीर स्थिति में एक से अधिक मरीज आ जाए,तो उनके लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण वीरवार दोपहर को सामने आया। दुगरी के गुरु ज्ञान विहार निवासी एक चालीस वर्षीय महिला सुबह ग्यारह बजे स्वाइन फ्लू के संदिग्ध लक्षणों के साथ यहां पहुंची। उक्त महिला को सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। जांच में सामने आया कि उक्त महिला को नियोनाइटिस, टेपटेटिस व लंग्स में काफी दिक्कत थी। यहां के डॉक्टरों ने कुछ देर मैनुअल वेंटीलेटर पर रखा और करीब एक बजे महिला की हालत देखते ही उसे तुरंत पीजीआइ जाने के लिए कह दिया, लेकिन उक्त महिला के पारिवारिक सदस्य उसे सीएमसी ले गए। हालांकि देर रात्रि तक उक्त महिला में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की थी। इस संबंध में जब अस्पताल के एसएमओ डॉ.परविंदरपाल सिद्धू से बात की गई तो उनका कहना था कि जिला स्तर के सरकारी अस्पताल में जो सुविधाएं होनी चाहिए, वह मौजूद है। गंभीर मरीजों को यहां नहीं रखा जाता। उन्हे स्पेशली केयर के लिए मेडिकल कॉलेजों में रेफर कर दिया जाता है।
नई तकनीक के वेंटीलेटर की कमी : सिविल सर्जन
उधर, स्वाइन फ्लू से निपटने की तैयारियों को लेकर सिविल सर्जन डॉ.रेनु छतवाल का कहना है कि सिविल अस्पताल में स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड व पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध हैं। उन्होंने माना कि अस्पताल में नई तकनीक के वेंटीलेटर की कमी है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के वेंटीलेटर उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को पहले ही लिखा जा चुका है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.