पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंलुधियाना. हक की लड़ाई अक्सर लंबी और कठिन होती है। हमें भी 'साड्डा हकÓ के लिए बहुत लंबी और मुश्किल लड़ाई लडऩी पड़ी। यह कहना है अपने विषय को लेकर विवादों में रहने और तीन स्तर पर प्रतिबंध सहने वाली पंजाबी फिल्म 'साड्डा हक' के निर्माता कुलजिंद्र सिद्धू और दिनेश सूद का।
ये दोनों ने बुधवार को फिल्म के निर्देशक मनदीप बेनीपाल और अदाकारा हिमांशी खुराना के साथ फिल्म की रिलीज के लिए किए संघर्ष को पत्रकारों से सांझा कर रहे थे। यह फिल्म अंतत: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार शुक्रवार को ए सर्टिफिकेट के साथ देश के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इससे पहले फिल्म के पूर्व नियत रिलीज डेट 5 अप्रैल से एक दिन पहले पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकारों ने इसे बैन कर दिया था।
फिल्म के निर्माता दिनेश सूद ने कहा कि 'साड्डा हकÓ को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए बहुत मुश्किल उठानी पड़ी। शायद ही कोई पंजाबी फिल्म होगी, जिस पर तीन बार बैन लगा होगा। इस फिल्म को पहले तो सेंसर बोर्ड की प्राइमरी कमेटी, फिर उसकी रिव्यू कमेटी ने बैन किया। तमाम कोशिशों के बाद जब उन्होंने 5 अप्रैल को फिल्म रिलीज के लिए हरी झंडी दे दी तो राज्य सरकारों ने मना कर दिया, जो कि सरासर गलत था। इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट गए और आखिर जीते। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म का केवल 14 सेकेंड का एक सीन काटा है और यू के बजाय ए सर्टिफिकेट देकर रिलीज करनी की अनुमति दे दी है। इससे सभी बहुत खुश हैं। फिल्म ने विदेशों में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत के दर्शकों में भी इसे लेकर काफी उत्साह है। इसलिए यहां भी अच्छे बिजनेस की उम्मीद है।
संवेदनशील है विषय
फिल्म निर्माता कुलजिंद्र सिद्धू के मुताबिक, 'फिल्म 80 और 90 के दशक के पंजाब के कठिन दौर की कहानी है। लोग इसे संवेदनशील कह रहे हैं, लेकिन हमने एक पक्ष की बात रखी है और अपनी तरफ से सच दिखाने की कोशिश की है।Ó
ज्यादा प्रिंट होंगे रिलीज
फिल्म को बैन करने पर हुए नुकसान के सवाल पर दिनेश सूद का कहना है कि अगर फिल्म अपने तय दिन पर रिलीज हो गई होती तो अनुमानत: 10 करोड़ का बिजनेस होता। लेकिन एक सकारात्मक बात यह है कि अब यह फिल्म पहले से कहीं ज्यादा प्रिंट्स के साथ रिलीज हो रही है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.