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सेक्रेटेरिएट में 5 साल रूम को तरसे तिवारी, अब बिट्‌टू की मांग, डीसी को लिखा लेटर

7 वर्ष पहले
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लुधियाना. सांसद बनने के बाद मनीष तिवारी 'एमपी फेसिलिटेशन सेंटर' स्कीम के तहत मिनी सेक्रेटेरिएट में एक अदद कमरे को तरसते रहे। वो सूचना एवं प्रसारण मंत्री तक बन गए लेकिन उनको यह सुविधा केंद्र में सरकार बदलने तक न मिल सकी। अब उसी योजना के तहत पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते और मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्‌टू ने कमरे की डिमांड रखी है।
हुआ यूं कि मनीष तिवारी एमपी बने तो पेशे से एडवोकेट होने के नाते उन्होंने सांसद की सुविधाओं की पड़ताल करवाई। इसके तहत उन्होंने शासन-प्रशासन से मिलने वाली हर सुविधा लेनी चाही। मगर हवा का रूख देखकर चलने वाली ब्यूरोक्रेसी ने उन्हें इस मामले में भी प्रोटोकॉल की खानापूर्ति वाले अंदाज में झटका दिया। केंद्रीय योजना पर अमल करते हुए जिला प्रशासन ने उनको "एमपी फेसिलिटेशन सेंटर' के लिए कमरा अलॉट तो कर दिया।
मगर जब एमपी लेड फंड का 1.61 लाख रुपये खर्च होने से कमरा सजकर ऑफिस में बदला तो उसकी हकदार एक अंडर ट्रेनी आईएएस अफसर बन गईं। किसी तरह जब यह कमरा एमपी को मिलने की नौबत आई तो उनके स्टाफ ने एतराज जता दिया।
इसके बाद तय ये हुआ कि एमपी को नया कमरा मिले और पुराने कमरे पर खर्च पैसे वापस किए जाएं। इन्हीं पैसों से नए कमरे को एमपी के फेसिलिटेशन सेंटर में बदला जाए। मगर फिर न कमरा ढूंढा जा सका और न पैसे वापस मिले, लेकिन तब केंद्र में सरकार बदल गई और मनीष तिवारी पूर्व सांसद बन गए। इन सारे हालात के बावजूद मौजूदा सांसद बिट्टू ने भी कमरे की डिमांड रखी है।
यह है 'एमपी फेसिलिटेशन सेंटर'
हर एमपी को मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम (एमपीलेड ) का फंड मिलता है। अफसरों से उम्दा कोऑर्डिनेशन के लिए डीसी ऑफिस में ही एमपी को कमरा अलॉट होता है। एमपी केंद्र की स्कीम्स और फंड्स से होने वाले कामकाज की देखरेख करने वाली डिस्ट्रिक्ट विजिलेंस एंड मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन भी होते हैं। इसलिए मिनी सेक्रेटेरिएट में उनका ऑफिस खुला तो तालमेल बेहतर और काम उम्दा होगा।