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खौफ खाते थे हुक्मरान-अफसरान अक्खड़ मिजाज जत्थेदार तलवंडी से

7 वर्ष पहले
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तलवंडी का फाइल फोटो।
लुधियाना. जिंदगी के 85 में से 60 साल सियासत के नाम करने वाले जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी अब दुनिया में नहीं रहे, मगर उनके सियासी-किस्से हमेशा मशहूर रहेंगे। जमीन से सियासत शुरू कर बुलंदियों तक पंथक राजनीति का भी तजुर्बा रखने वाले जत्थेदार तलवंडी की अक्खड़ मिजाजी व तल्खी के चलते तमाम हुक्मरान और अफसरान उनसे खौफ खाते थे। पता नहीं कब किसे और किस गलती पर खरी-खोटी सुना डालें। दरअसल वह घुमावदार सियासत में भी खरी बात कहने के कायल थे। बिना लाग-लपेट वाले इसी सियासी अंदाज के चलते जत्थेदार तलवंडी कई मौकों पर विवादों में भी घिरे।

जत्थेदार तलवंडी की मौत पर लुधियाना के सराभा नगर में उनके निवास पर अफसोस जताने पहुंचे सूबे के कैबिनेट मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों व मेयर हरचरण सिंह गोहलवड़िया ने जत्थेदार तलवंडी को उनकी साफगोई के लिए याद किया। चाहे जत्थेदार सरपंच रहे, एमएलए बने, सूबे में मंत्री पद संभाला या एमपी बनकर संसद पहुंचे, मगर मिजाज नहीं बदला। एसजीपीसी के प्रधान बनने पर भी वही तल्खी रही। शिरोमणि अकाली दल के सरपरस्त होने के नाते पार्टी में भी कोई उनकी बात काटने की जुर्रत नहीं करता था। यहां काबिलेजिक्र है कि कैप्टन सरकार के कार्यकाल में लुधियाना में अकाली-भाजपा गठबंधन के साझा कार्यक्रम के दौरान जत्थेदार तलवंडी ने सीएम को चुनौती देते हुए सरेआम आपत्तिजनक डायलॉग बोला था। वह शिअद के सरपरस्त थे, मंच पर मौजूद सीनियर अकाली नेताआें के साथ ही भाजपा के पंजाब इंचार्ज अरुण जेटली को भी इस मुद्दे पर जवाब देने में पसीने आ गए थे।

कभी अकाली सियासत में उनके साथ रहे और फिर बागी हुए पूर्व विधायक व पंजाबी सभ्याचार के बाबा बोहड़ कहलाने वाले जगदेव सिंह जस्सोवाल भी उनकी मौत पर अफसोस जताने गांव तलवंडी पहुंचे। वहीं मौजूद अकाली नेता नाजर सिंह ने याद किया कि सच का साथ देने वाले जत्थेदार तलवंडी ने कई मौकों पर पार्टी वर्करों की सुनवाई न करने वाले अफसरों की क्लास लगाई। विपक्षी दलों के नेता भी उनकी बेबाकी के कायल थे।
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